Font by Mehr Nastaliq Web

माया में लपटाइल

maya mein laptail

कृष्णानन्द कृष्ण

कृष्णानन्द कृष्ण

माया में लपटाइल

कृष्णानन्द कृष्ण

और अधिककृष्णानन्द कृष्ण

    हमार बा, हउ तोहार सभे जपत बा

    बात समझ में केहू के कुछ आवत नइखे

    सभे पेंड़ के पतई अस देखीं टूटत बा

    भाईचारा तबहूँ के भावत नइखे।

    गावत बाड़े राग बेसुरा देखीं भाई

    आपन-आपन। केहू से नइखे केहू के

    मतलब देखीं। बना रहल परबत के राई

    जानत बाटे रंग लाल, सबके लोहू के।

    रंग फूल के, गंध फूल के अलगे होला

    एके के बा सभे बनावल, कइसन खेला

    सबके भीतर बाड़े भाई एके चोला

    देखीं लोग फँसल माया में अजब झमेला

    समझत, बूझत साथ इहाँ से कुछ ना जाई

    माया में लपटाइल लोग भुलाइल भाई।

    स्रोत :
    • पुस्तक : आपन गाँव भेंटाते नइखे (पृष्ठ 32)
    • रचनाकार : कृष्णानन्द कृष्ण
    • प्रकाशन : पुनः प्रकाशन, पटना
    • संस्करण : 2012

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY