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सौ साल में ऊ

sau saal mein uu

तैयब हुसैन पीड़ित

तैयब हुसैन पीड़ित

सौ साल में ऊ

तैयब हुसैन पीड़ित

और अधिकतैयब हुसैन पीड़ित

    (शहीद भगत सिंह के जनम-शताब्दी पर)

    महज चौबीस साल के लइका

    जे लइकाई में

    जालियावाला बाग के

    लाल माटी सुंघले रहे

    जो

    एतना खतरनाक

    हो सकेला

    कि

    ओके साथियन समेत

    सब नियम ताखा पर रखत

    एक दिन पहिलहीं

    साँझ के

    फाँसी पर लटकावल

    विदेशी दुश्मन जरूरी समुझलन

    'इरविन पैक्ट' में

    तबके देशी दोस्तो

    दफनावल बेस्तुर

    हमनी

    समझ सकीले

    ओकर अहमियत

    ना अवतारी रहे

    ना चमत्कारी

    ना इलहामे भइल रहे ओकरा

    असली आजादी के,

    हँ,

    समय से कुछ पहिले

    पहिचान लेले रहे

    जरूर

    राजनीति के सब

    धंधा, फंदा हथकंडा

    जेह में

    निरीहजन के

    कानूनी चूहादानी में

    फँसा के

    मारल जाला

    बिल्ली याकी दिल्ली सरकार

    अहिंसा के चोंगा गँथले

    भगतिन बनल रहेली

    एही से

    बहिर अदालत में

    जोर के धमाका कइलक

    इतिहास के

    खूनी क्रांति देलक

    'इंकलाब जिन्दाबाद' में

    लिखलक

    शोषण-मुक्त समाज तक

    लगातार

    बदलाव के इबारत।

    अइसहीं ना

    सौ साल में

    अउर निखरल

    नवजवानन में

    लतर नियर

    पसरल

    जहाँ

    तबे

    देशभक्ति में

    पूँजी धरम के घालमेल रहे

    आज

    दांडी-यात्रा के 75’ वीं वर्षगाँठ में

    आयोडीनवाला निमक के

    निमकहरामी

    उहाँ

    सत्याग्रह के शताब्दी में

    उदारीकरण के

    नया गुलामी

    उतार फेंके के सोचत लोग

    'लगे रहो मुन्ना भाई'

    के गाँधीगिरी पर

    भले हँस लेवस

    बाकी बूझत बाड़न

    'रंग दे बसंती'

    के

    जरूरत।

    स्रोत :
    • पुस्तक : अनसोहातो (कविता-संग्रह) (पृष्ठ 21)
    • रचनाकार : तैयब हुसैन पीड़ित
    • प्रकाशन : शब्द संसार, पटना
    • संस्करण : 2011

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