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मादाम लेक्सोतान

madam leksotan

एनसिआ वेरदूची

एनसिआ वेरदूची

मादाम लेक्सोतान

एनसिआ वेरदूची

और अधिकएनसिआ वेरदूची

    क्या होते हैं छह मिलीग्राम

    दिन में तीन बार अगर उससे

    सुन्न हो जाएँ भावनाएँ,

    अगर ख़त्म हो जाएँ सब चिंताएँ,

    हँसना, रोना, महसूस करना

    आदि अंत दुनिया का।

    बस मुँह खोलना ही काफ़ी है :

    असमंजस में नहीं है अब गृहिणी

    सुपरबाज़ार की चीज़ों के रेले के आगे

    बहस नहीं करते हैं व्यभिचारी पति और पत्नियाँ

    दांपत्य शय्या के अनाथत्व की

    कोई चीज़ परेशान नहीं करती टैक्सी चालक को

    सिवाय लाल बत्ती के

    मादाम लेक्सोतान, साथ हैं अगर आप

    तो फिर क्या घबराना।

    स्रोत :
    • पुस्तक : यह संपन्नता बिखरी हुई (पृष्ठ 297)
    • संपादक : श्यामा प्रसाद गांगुली, मीनाक्षी संद्रियाल
    • रचनाकार : कवि के साथ अनुवादक श्यामा प्रसाद गांगुली, मीनाक्षी संद्रियाल
    • प्रकाशन : साहित्य अकादेमी एवं ग्रूलाक
    • संस्करण : 2006

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