Font by Mehr Nastaliq Web

कृष्ण

krishn

कहथु क्यो विद्वान अहाँकेँ योगिराज

भगवान स्वयं गोलोक निवासी

मुदा हमर हृदय नहि अछि तैयार

तकरा मानक लेल!

भैयारीमे हिस्सा-बखराकेर विवाद

सामान्य बात थिक। वरं तुच्छ बात थिक!

यदि दुर्योधन नहि दैत रहथि

पाण्डवकेँ धनमे बखरा

तँ पंचैतीक प्रयत्नमे लगितहुँ!

कौरव पाण्डवक पक्षसँ भिन्न

निरपेक्ष दलक करितहुँ संघटना!

जकर दबाबेँ, दुर्योधन

समझौताक बाट पर आनल जा सकितथि

अथवा पाण्डवगण तँ रहथि

अहाँकेर बात सुनैत,

हुनके सबकेँ हिस्सा छोड़ि देबाक

विचार दितहुँ।

जीवन यात्राकेर पथ पर बढ़बामे

पुरुषक लेल

सम्पत्ति बपौती नहि होइछ आवश्यक।

एक अर्जुनकेर नजरि पर अपनहुँ अयलनि

युद्धक सत्यानाशी परिणाम दुखद

फेकि अपन गाण्डीव

कयल घोषणा नहि लड़बाक

तँ अहाँ हुनको अपन वाक्जालसँ बान्हि

सनका कय चढ़ा देलहुँ युद्धक पथ पर।

बर्बर पशुक समान लड़इत गेल।

कास-पटेढ़क बोन-जकाँ

मनुक्खक मस्तक कटइत गेल।

बेटा भातिज भाय

काका मामा बाबा नाना

बहिनो सार

गुरु पितामह

कोनो प्रकारक सम्बन्धक बन्धन-स्नेह

नहि रहि सकल अवंच!

एहि युद्धकेर प्रेरक, प्रोत्साहक

संचालक बनि अहाँ

की नहि कयलहुँ मानवताक लास पर

पशुताक स्थापना?

निर्जन प्रदेशमे बसिते अछि चिर शान्ति

तेँ शान्ति स्थापनाकेर बातो थिक असंगत!

काम वासनाकेर दमन करबा लेल

सकल पुरुषकेँ बधिया कय देब

के मानत बुधियारी?

कोन बहुजन हितकारी दर्शनक

स्थापना कयल अहाँ पाण्डवक राजमे?

अट्ठारह अक्षौहिणी सेनामे

आठ गोट जन मात्र बाँचल

एहन भयानक नरसंहारक संघटना

एक अहींकेर प्रेरणाक बस भेल रहय।

कलियुगहुमे आइ धरि एहन भेल नहि दोसर

अहाँकेँ निर्मम कहि के फोड़ाओत कपार?

मुदा तञ भगवानो मानक लेल छी नहि हम तैयार।

स्रोत :
  • पुस्तक : कतेक दिनक बाद (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 6)
  • संपादक : डॉ कैलासनाथ झा, शिवशंकर श्रीनिवास
  • रचनाकार : काञ्चीनाथ झा 'किरण'
  • प्रकाशन : किरण मैथिली साहित्य शोध संस्थान (धर्मपुर, लोहना रोड, दरभंगा)
  • संस्करण : 1989

Additional information available

Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

OKAY

About this sher

Close

rare Unpublished content

This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

OKAY