Font by Mehr Nastaliq Web

की गाउ?

ki gau?

नैनामे लहुक लेश ने छै उपमान हेतैक सरोज कोना

जागल छै छातीक हाड़-हाड़ चकबा बनतैक उरोज कोना

पेट पीठ सटि एक भेल सोपान मनोजक हैत कोना

बच्चा बिलखै छै दूध बिना बनतै कहु सोमक घैल कोना

बतरी बंका झाउक बनमे हैत कोना मधुश्रीक विकास

अन्न पेट दम तनमे के गाओत मलार मनोहर रास

नहि शिव दधीचि, नहि याज्ञवल्क्य, वाचस्पति मंडन वा उदयन

कऽ दैत अछि अवदात चरित, हृदय बीच भावक सिरजन

भुइयाँमे बैसथि विप्र जतय श्वान सुतै अछि गादी पर

कृतकृत्य होइत तकरे सब क्यो बजबै अछि चुटकी हाथी पर

छै भेल अखन्नर पेट एहन रग-रगमे सभहिक लोभ भरल

होयताह एतय कहु आइ कोना वाचस्पति मंडन वा उदयन

लै अगणित कविगण भैरव उन्मत्त शंकरक रूप धरब

प्रलयंकर हुंकार भरल भूकम्प राग केर गान करब

शेष मरत, भू काँपि उठत, दम्भी नगपतिगण माटि मिलत

भय आबि खसत जलद जाल बारुद समान वारिधि धधकत

पाखण्डपनी रूढ़िवाद कुलवैभव केर मिथ्याभिमान

जरि हैत जखन वसुन्धरा सबतरि वासोचित समान

गैब तखन हम मेघराग धधरासँ झहरत सलिल धार

कोइला बनि जायत शस्य श्याम संतप्त धरा सुन्दर विहार

समयक प्रतिनिधि समयानुकूल मधुभाषी कोकिल तखन बनब

मंजुल मातृ मही मिथिलामे घर-घर तिरहुत गान करब।

स्रोत :
  • पुस्तक : कतेक दिनक बाद (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 47)
  • संपादक : डॉ कैलासनाथ झा, शिवशंकर श्रीनिवास
  • रचनाकार : काञ्चीनाथ झा 'किरण'
  • प्रकाशन : किरण मैथिली साहित्य शोध संस्थान (धर्मपुर, लोहना रोड, दरभंगा)
  • संस्करण : 1989

Additional information available

Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

OKAY

About this sher

Close

rare Unpublished content

This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

OKAY