Font by Mehr Nastaliq Web

खूनवाँ पुकारइ बीरन जागउ

khunvan pukarai biran jagau

नरेन्द्र कुमार

नरेन्द्र कुमार

खूनवाँ पुकारइ बीरन जागउ

नरेन्द्र कुमार

और अधिकनरेन्द्र कुमार

    खुनवाँ पुकारइ बीरन जागउ झोपरिया जिनि बइठउ हो।

    सहि जाइ अब गुलमियाँ जंजीरिया धइ तोरउ हो।

    महला से मलिका हँकारइ मलकिनियाँ दुत्कारइ हो।

    हँसे तोदवा फुलाउ साहूकरवा संसद खेलवार करइ हो॥

    रोज-रोज सिसके धरतिया सिसकि गोहरावइ हो।

    भइया धाइ लागउ तिरिया गोहार माई के पति राखउ हो।

    गोरवन के बदला असनवाँ ससनवाँ ऊहँइ बाटइ हो।

    बइठी कुरसी पे मारि के गेंडुलिया नागिन फुफकारइ हो।

    जोति-बोइ करेउँ किसनियाँ बखार मलिका भरतेउँ हो।

    लिखी तोहरे लिलारे भुखमरिया बेगारी कबले खटिबउ हो!

    माँगे नाहीं तनिकउ सेंदुरवा सिंगार मुरझाइ गयेउ हो।

    धरती माई के फटइ करेजवा दरद तनी देखउ हो!

    मुकुति के उगिहैं सुरुजवा सकारे लोही लागइ हो!

    फूटे पुरुब ललाई असमान विहान पुरवा झोंकइ हो॥

    उठउ रणबिगुला बजावउ झंडा फहरावहु हो।

    जागउ-मंजुरा-किसान-जवान लड़ैया छिड़ी बाटइ हो॥

    1984

    स्रोत :
    • पुस्तक : अब होगी बरसात (पृष्ठ 68)
    • रचनाकार : नरेन्द्र कुमार
    • प्रकाशन : जन संस्कृति प्रकाशन
    • संस्करण : 1990

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY