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खेजड़ी

khejDi

नरेश मेहन

नरेश मेहन

खेजड़ी

नरेश मेहन

और अधिकनरेश मेहन

    मैं

    खेजड़ी हूँ

    तपती रेत के

    समुद्र में

    अकेली

    उद्देश्यविहीन

    नहीं खड़ी हूँ

    जीवन का

    प्रत्यक्ष प्रतिबिंब हूँ।

    मैं

    अपने वजूद से

    लोगो को

    जीना सिखाती हूँ।

    मैं

    देती हूँ घर

    तपती लू में

    पक्षियों को।

    देती हूँ छाँव

    अपने जीवों को।

    फिर

    करती हूँ

    प्यार की बातें

    अपने धारों से।

    अगर

    आप देना चाहते हो

    दुनिया को

    प्रेम और आश्रय

    तो देखो मेरी तरफ़।

    इतनी तपती

    रेत में भी

    शीतल रहती हूँ

    दुनिया को

    शीतलता देती हूँ।

    क्या

    आप नहीं कर सकते

    थोड़ा-सा प्रयास

    खेजड़ी बनने का

    मुझे बचाने का

    या रहने का

    मेरे आस-पास।

    स्रोत :
    • रचनाकार : नरेश मेहन
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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