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खाँटी घरेलू औरत-29

khanti gharelu aurat 29

ममता कालिया

ममता कालिया

खाँटी घरेलू औरत-29

ममता कालिया

और अधिकममता कालिया

    उँगलियों पर गिन रही है दिन

    खाँटी घरेलू औरत

    सोनू और मुनिया पूछते हैं,

    ‘क्या मिलाती रहती हो माँ

    उँगलियों की पोरों पर’

    वह कहती है,

    ‘तुम्हारे मामा की शादी का दिन

    विचार रही हूँ...

    कब की है घुड़चढ़ी, कब की बरात!’

    घर का मुखिया यही सवाल करता है

    तो आरक्त हो जाते हैं उसके गाल!

    कैसे बताए कि इस बार

    ठीक नहीं बैठ रहा

    माहवारी का हिसाब!

    स्रोत :
    • पुस्तक : खाँटी घरेलू औरत (पृष्ठ 49)
    • रचनाकार : ममता कालिया
    • प्रकाशन : वाणी प्रकाशन
    • संस्करण : 2009

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