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क हो का हाल-चाल?

ka ho ka haal chaal?

प्रकाश उदय

प्रकाश उदय

क हो का हाल-चाल?

प्रकाश उदय

और अधिकप्रकाश उदय

    हो का हाल-चाल?

    चकाचक। ठीकठाक। ठीकेठाक।

    कभी घन्नेघना

    कभी मुठी चना

    कभी ऊहो मना

    बाकी पूछे जो केहू कि का हाल-चाल...

    चकाचक। ठीकठाक। ठीकेठाक।

    देसा-बिदेसा में टन्सन बहुत

    आफत आफत बिपत बिपत रामा—

    कुफुते-कुफुत!

    अरे धुत्! धुत् बुड़बक!

    टन्सन है कि खइनी है चूना नहीं...

    कहती है बीबी—

    नहइला बिना प्यारे, जूता भी छूना नहीं...

    गुरू... बहुते सही...

    सही हौ भइया, एही बात प...

    चाह चउचक पियावऽ जानीं

    पान खइबऽ खा

    ना खियइबऽ जा

    हमके चूना लहा जानीं...

    अइसा है भइया...

    कि कइसे बताएँ कि कइसा है

    तुम्हरे तो खातिर में

    चाह-पान कौन जिनिस

    जीव-जान जौन कहो हाजिर है

    बाकिर का है कि टाइम का तोड़ा है

    अभी हैं इद्धर, पर—

    दुइए मिनिट बाद उद्धर को होना है

    जागमजाग... भागमभाग...

    टेम पर खाना पीना सोना है

    काऽऽ करिएगा...

    बहुत-बहुत पाना है

    तो कुछ-ना-कुछ तो खोना है...!

    अरे छोड़ऽ हो

    आवऽ

    बइठऽ

    बतियावऽ दुइ गाल

    केहू जो पूछे कि का हाल-चाल...

    चकाचक। ठीक-ठाक। ठीकेठाक।

    कभी घन्नेघना

    कभी मुठी चना

    कभी ऊहो मना

    बाकी पूछे जो केहू कि का हाल-चाल...

    चकाचक। ठीकठाक। ठीकेठाक।

    स्रोत :
    • पुस्तक : अरज-निहोरा (पृष्ठ 88)
    • रचनाकार : प्रकाश उदय
    • प्रकाशन : राजकमल प्रकाशन
    • संस्करण : 2020

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