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जुनून और इक़बाल

junun aur iqbaal

एवॉ तोथ

अन्य

अन्य

एवॉ तोथ

जुनून और इक़बाल

एवॉ तोथ

और अधिकएवॉ तोथ

    मुझे नफ़रत है

    दावेदार की हिफ़ाज़त से

    बेग़रज़ के इत्मीनान से

    आपसी रज़ा की सर्द गुमनामी से

    मुझमें है डाह

    कुछ तो है खोने को

    मुझे नहीं चाहिए आशिक़ या दोस्त

    चुहल के वास्ते

    सैर-सपाटे को

    मेले-ठेले के लिए

    सनीचरी रात या इतवारी दुपहर में

    वक़्त काटने के लिए

    चाहिए मुझे एक मर्द

    जो मेरा हमदम मेरे बावलेपन तक हो

    वह जिसके आगे मैं कपड़े उतार सकूँ

    और अपनी बेहतरीन उरियानी ओढ़ सकूँ

    वह जो करे प्यार मुझे और भी ज़ियादा

    जब मैं हो जाऊँ बदसूरत बदरंग

    वह जिसके निस्बत हो कोई फ़िक्र मुझे

    सड़क पर या आपसदारी के

    तयशुदा वक़्फों में

    ऐसा जो कहीं भी चला चले संग मेरे

    हर कहीं ठहर रहे साथ में

    वह जिसकी बाँह

    मेरे सिर के नीचे तकिया बन जाए

    वह जिसे सुला पाऊँ मैं

    जो मुझे जगाया करे

    स्रोत :
    • पुस्तक : दस आधुनिक हंगारी कवि (पृष्ठ 123)
    • रचनाकार : कवि के साथ अनुवादक गिरधर राठी, मारगित कोवैश
    • प्रकाशन : वाग्देवी प्रकाशन
    • संस्करण : 2008

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