Font by Mehr Nastaliq Web

झूमत आवइ बरखा बदरिया!

jhumat avai barkha badriya!

नरेन्द्र कुमार

नरेन्द्र कुमार

झूमत आवइ बरखा बदरिया!

नरेन्द्र कुमार

और अधिकनरेन्द्र कुमार

    रोजइ होत साँझ भिनसार होऽ

    सिवनवाँ में गरजइ बन्दुकिया॥

    गाउँ-गाउँ घूमइँ थानेदार होऽ

    बहिनियन के लूटइँ इजतिया॥

    बगिया में रजवा बसाये बा पहरवा

    फूलवन के पंखुरी में घोलि के जहरवा

    होये कइसे माई कऽ सिंगार होऽ

    गोहार मारइ डाल पे कोइलिया॥

    रंग लाये बीरना तोहार कुरबनियाँ

    चाँदी जइसे तनवाँ के सोना अस जवनियाँ

    भूले नऽ सुरतिया तोहार होऽ

    नयनवाँ से फूटइ चिनगरिया॥

    घेरे बाटइ रतिया बिहान कइ किरनियाँ

    रहुआ गरासे पूरनमासी कइ चँदनियाँ

    रोवइ अंधियारे भिनसार होऽ

    बिरावइ मुँह पाँउ कइ जंजीरिया॥

    देखऽ अइसन पच्छ अउ विपच्छ देखऽ मितवा

    एक ओर खाईं दुसरे अंधकूपवा

    मारऽ मुँह थबरा के मार होऽ

    भरमवाँ के खोल गठरिया॥

    माथे-पे पगरिया कमर में कफनवाँ

    सपना हमार बाटइ ऊँच असमनवाँ

    मुकुति पहरिया के पार होऽ

    सपनवाँ के लहरे फसलिया॥

    बूँद-बूँद खूनवाँ से भरि गइ गगरिया।

    बूँद-बूँद पनियाँ से बनी अब लहरिया

    बहइ झकझोर के बयार होs

    झूमत आवइ बरखा बदरिया॥

    20.10.1989 (वाराणसी)

    स्रोत :
    • पुस्तक : अब होगी बरसात (पृष्ठ 74)
    • रचनाकार : नरेन्द्र कुमार
    • प्रकाशन : जन संस्कृति प्रकाशन
    • संस्करण : 1990

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY