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झिंझिरकोना

jhinjhirkona

अशोक कुमार दत्त

अशोक कुमार दत्त

झिंझिरकोना

अशोक कुमार दत्त

और अधिकअशोक कुमार दत्त

    झिझिर कोना-झिझिर कोना, कोन कोना जाउ?

    जेम्हरे पबै छी, तेम्हर नुकाउ!

    पेट काटि पैसा गामे पठाबी

    फुटपाथे गुजारि, मुदा सहरू कहाबी

    मजदूरियो लेल माथ फुटय,

    जान कोना बचाउ?

    गाम जाउ, गाय पोसू, खुरपी चलाउ।

    झोपड़ी उजड़ि गेल, एपार्टमेन्ट'क होड़

    सोहर-समदाउन सुटकल, 'डी.जे.'क सोर

    देबाल सँ धाह उठय, त्राण कोना पाउ?

    'ए.सी.' नहि, अगल-बगल

    गाछ-बिरिछ लगाउ!

    पैदल नहि चली हम, 'बाइके' उड़ै छी

    ट्रेन छोड़ि, लोन बाला 'कारे' चढ़ै छी

    'मौर्निंग वाको' काल, दम घुटय

    'आक्सीजन' भेटाउ!

    साइकिल चलाउ, 'इको फ्रेण्डली' बनाउ!

    सुइबाला दूध सजमनि, सड़के सजल

    रंग-बिरंगा बीमारी घरे बसल

    धनी-मेथी, पातक गंध,

    कतऽ गेल बताउ?

    यूरिया नहि खेतमे, गोबर गिराउ!

    'ड्रेन' कात 'वाटर-सप्लाइ' फुचक्का छोड़ैए

    'आर्सेनिक' बाला पानि 'मिनरल वाटरे' बिकैए

    हीआ ने जुड़ाइ भोला, की करू बताउ?

    नालाक गन्हाएल धार, जुनि गंगा मे बहाउ!

    'मल्टीनेशनल' मे इंजीनियर', जेना हाथीक महावत

    दहेजो त्यागल तैयो, कन्यागत नदारद

    बेटा बुढ़ाँठ भेल, बहुरिया भेटाउ

    'भ्रूण हत्या' बन्न करू, बुच्ची बचाउ।

    स्रोत :
    • पुस्तक : झिझिरकोना (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 1)
    • रचनाकार : अशोक कुमार दत्त
    • प्रकाशन : शेखर प्रकाशन, पटना
    • संस्करण : 2017

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