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जंगली कलहंस

jangli kalhans

अनुवाद : शायक आलोक

मैरी ऑलिवर

मैरी ऑलिवर

जंगली कलहंस

मैरी ऑलिवर

और अधिकमैरी ऑलिवर

    तुम्हें अच्छा होने की आवश्यकता नहीं

    तुम्हें रेगिस्तान में सौ मील घुटनों के बल चलते हुए

    पश्चाताप करने की आवश्यकता नहीं

    तुम्हें केवल अपनी देह के कोमल प्राणी को करने देना है प्रेम

    जिससे भी वह प्रेम करता है

    बताओ तुम मुझे अपनी निराशा के बारे में

    और मैं तुम्हें अपनी निराशा बताऊँगी

    इस बीच संसार चलता रहता है

    इस बीच सूर्य और वर्षा के पारदर्शी कंकड़

    भू-दृश्यों से गुज़र रहे हैं

    घास के मैदानों और सघन वृक्षों

    पर्वतों और नदियों के ऊपर

    इस बीच ऊँचे आकाश की स्वच्छ नीली हवा में

    जंगली कलहंस फिर अपने घर लौट रहे हैं

    तुम जो कोई भी हो, कितने भी एकाकी

    संसार स्वयं को तुम्हारी कल्पना के सम्मुख अर्पित करता है

    जंगली कलहंसों की तरह तुम्हें पुकारता है, तीख़े और उत्तेजक स्वर में—

    बार-बार घोषित करता हुआ तुम्हारी भी जगह

    अस्तित्व के परिवार में।

    स्रोत :
    • रचनाकार : मैरी ऑलिवर
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए शायक आलोक द्वारा चयनित

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