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जँ हम कोनो कवि होइतहुँ

jan hum kono kavi hoitahun

श्याम दरिहरे

श्याम दरिहरे

जँ हम कोनो कवि होइतहुँ

श्याम दरिहरे

और अधिकश्याम दरिहरे

    जँ हम कोनो कवि होइतहुँ

    तँ हम एकटा बेछप कवि होइतहुँ।

    अहाँक मुस्कानपर

    लिखितहुँ कविता कए हजार

    अहाँक सौन्दर्यकेँ दितहुँ ठेका

    एवरेस्ट शिखर धरि

    प्रेममे डूबा दितिऐक संसार।

    मिटा दितिऐक अही बहने

    सबटा घृणा

    सबटा त्रासदी

    संत्रास।

    अहाँक प्रेममे मातल हमरा सन कविकेँ

    कुंठामे आकंठ डूबल कत लोक

    दक्षिणपंथी कहितैक

    मुदा तइसँ की

    हम थोड़बे चुप भऽ जइतिऐक।

    अहाँकेँ देखि भूखल-नाँगट

    कविताक अठारह अक्षौहिणी पाँति

    हम कऽ दितिऐक ठाढ़

    जाड़मे ठिठुरैत

    नरकंकाल सन देखि

    अहाँक देह

    सबहक हाथ दितिऐक धरा

    एक सए आठ सोरहि

    धरगर-तेजगर कविता।

    किछु खुटेसल लोक

    भने वामपंथी कहितय हमरा।

    हम तैओ नै रुकितहुँ

    कवितेकेँ बना लितहुँ

    अपन किला

    अपन कवच

    अपन ढाल

    अपन तरुआरि।

    केओ किछु कहितय

    हम अवश्य लिखितहुँ कविता

    अहाँक प्रेमक

    अहाँक रूपक

    अहाँक सुखक

    अहाँक दुखक

    हास्यक

    रुदनक क्रन्दनक।

    लिखितहुँ सबटा डंकाक चोटपर

    ओतबे आत्मीयतासँ

    शिद्दति गंभीरतासँ।

    लिखिते-लिखिते कविता

    हम कहिओ

    चलि जइतहुँ निखत्तर

    हमरा कोनो दुख

    नै होइतय

    अपन अभोगे मरबाक।

    मुदा नै कऽ सकितय

    केओ बन्न

    हमर उन्मुक्त कलम।

    जँ हमरा साराक लग दऽ कऽ

    अहाँ कहिओ गुजरितहुँ

    तँ सारासँ निकलैत

    हमर कविताक कोनो

    दर्द भरल पाँति अहाँ सुनितहुँ।

    जँ हम कोनो कवि होइतहुँ

    तँ हम कविता हर हालमे लिखितहुँ

    किएक तँ हम मनमौजी कवि होइतहुँ

    जँ हम कोनो कवि होइतहुँ।

    स्रोत :
    • पुस्तक : क्षमा करब हे महाकवि [मैथिली कविता-संग्रह] (पृष्ठ 121)
    • रचनाकार : श्याम दरिहरे
    • प्रकाशन : नवारंभ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2016

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