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जमशेदपुर टाटा

jamshedpur tata

प्रकाश उदय

प्रकाश उदय

जमशेदपुर टाटा

प्रकाश उदय

और अधिकप्रकाश उदय

    लोहे के गाड़ी लोहे के पटरी

    लोहे के जाय के बा नगरी हो, जमशेदपुर टाटा

    घरहीं में रहलीं, जांगर ठेठवलीं

    बहुते नइहर दुइ आखर पेठवलीं

    कइसन बयार बहे बहरी हो, जमशेदपुर टाटा

    बड़ घर के बेटी, बेपइसा के सेठी

    रोपे में डोभे में हाय-हाय हेठी

    कुँइया में कै हाथ पँवरीं हो, जमशेदपुर टाटा

    आपन बा खेती ना अनकर ना जोतीं

    कहिया ले ठाटी पतरा पोथी

    पँउआ पुजावल जबरी हो, जमशेदपुर टाटा

    काहे दो हो जाला रोज-रोज झगरा

    अनकर बेरामी बुझाला जे नखरा

    केकरा बले तनि कहँरीं हो, जमशेदपुर टाटा

    टिस्को में मामा के दिल बा दरिया

    हाकिम दुआरा रखा देले छरिया

    कल्हुए मिलल खुशखबरी हो, जमशेदपुर टाटा

    मामी के चाहीं बुढ़ारी के सेवा

    बेटा पतोह लोग भइले परेवा

    हमरो के नेवतल बा अबरी हो, जमशेदपुर टाटा

    आरे से पटना से दिन भर के रहिया

    गाड़ी में रहिहऽ सम्हर के तू कनिया

    देखते सवाँग धिया गठरी हो, जमशेदपुर टाटा

    घर देखलीं घर के बहरी से

    सासु जेठ गोतिन ननदी के

    जल के जइसे मछरी हो, जमशेदपुर टाटा

    लोहे के गाड़ी लोहे के पटरी

    लोहे के जाए के बाटे नगरी

    के जाने कतना अखरी हो, जमशेदपुर टाटा

    लोहे के गाड़ी लोहे के पटरी

    लोहे के जाय के बा नगरी हो, जमशेदपुर टाटा

    स्रोत :
    • पुस्तक : अरज-निहोरा (पृष्ठ 36)
    • रचनाकार : प्रकाश उदय
    • प्रकाशन : राजकमल प्रकाशन
    • संस्करण : 2020

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