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जहिया कहियो अहाँ मोन पड़लहुँ

jahiya kahiyo ahan mon paDalahun

छत्रानन्द सिंह झा

छत्रानन्द सिंह झा

जहिया कहियो अहाँ मोन पड़लहुँ

छत्रानन्द सिंह झा

और अधिकछत्रानन्द सिंह झा

    जहिया कहियो अहाँ मोन पड़लहुँ,

    हमरा आगाँ—

    एकटा अलिखित महाकाव्य

    पसरि गेल।

    घटना-क्रमक पथार लालि गेल।

    बहुतो रास हेरायल-भुतिआयल—

    स्मृति,

    बहुतो रास हँसी-खुशी

    राग-उपराग

    सब स्मृतिक अयनामे

    सप्राण फोटो-जकाँ

    ओहिना झलकि रहल अछि।

    हम अपना सोझा

    अहाँकेँ ठाढ़ि देखि बिस्मित छी।

    काल्हि जे किछु भेल—

    अनबधारल,

    आइ जे किछ अछि—

    अनसोचल।

    एनामे ककरो ठकमूड़ी लागि जायब

    अस्वाभाविक क्रिया नहि हेतै।

    हतप्रभ भेल हम,

    अपन आगाँ

    स्मृतिक अयनामे अहाँकेँ देखि

    ठकुआयल छी।

    आउ, आगाँ आउ!

    एहि महाकाव्यक अलिखित अंश

    आगाँ आउ।

    स्रोत :
    • पुस्तक : एक गुलाबक लेल (पृष्ठ 55)
    • रचनाकार : छत्रानन्द सिंह झा
    • प्रकाशन : नीलकण्ठ प्रकाशन, पटना
    • संस्करण : 1988

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