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हम एकटा सिक्का छी

hum ekta sikka chhi

श्याम दरिहरे

श्याम दरिहरे

हम एकटा सिक्का छी

श्याम दरिहरे

और अधिकश्याम दरिहरे

    हम एकटा सिक्का छी।

    अयलहुँ एहि धरतीपर

    कोनो चुनावी बेहरी जकाँ।

    देबऽ बला फोललनि अपन

    कारी कमाइक पोटरी

    लेबऽ बला नहि लिखलनि

    कोनो खाता-बहीमे।

    हाथे-हाथ भऽ गेलहुँ खर्च

    कोनो झूठा नेताक पोस्टरमे

    की ओकर विदेशी बोतलक तरलतामे।

    इहो कोनो बड़का बात नहि जे

    हम शामिल होइ ओहि करोड़मे

    जे घोटालाक बोरीसँ निकालि

    निछावर कयल गेलैक कोनो

    क्षीण कटिकाय नायिकाक रातिपर

    अथवा

    उड़ा देल गेल होइ मोनिका लेवेंस्कीक

    कामानन्दक एवजमे।

    मुदा तँ निश्चिते जे

    नहि कहिओ हम खसलहुँ

    ओहि छोट-छोट अजोह तरहत्थी मध्य

    जे रेलडिब्बाकेँ बहारैत वा

    चौकपर ठाढ़ मोटरकेँ पोछैत

    भऽ जाइत छैक अनचोकेमे बूढ़।

    आइ जखन खिआकऽ बद्दर छी भऽ गेल

    तँ होइए अपसोच—

    जीलहुँ ने किएक अपन जिनगी

    अपना मनमाफिक।

    स्रोत :
    • पुस्तक : क्षमा करब हे महाकवि [मैथिली कविता-संग्रह] (पृष्ठ 72)
    • रचनाकार : श्याम दरिहरे
    • प्रकाशन : नवारंभ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2016

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