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हव्वा की बेटियाँ

havva ki betiyan

सपना भट्ट

सपना भट्ट

हव्वा की बेटियाँ

सपना भट्ट

और अधिकसपना भट्ट

    हम हव्वा की बेटियाँ

    आदम ज़ात की तिलिस्मी चालों से नहीं

    भाषा की राजनीति से छली गई औरतें हैं

    ईश्वर के लिए

    हमे हिरनी, कोयल, चिरैया नहीं

    बल्कि एक इंसान समझिए

    आप हमें चौतरफ़ा संघर्षों में धकेलकर

    हमारी ही छाती पर कुंडली मारकर

    कर तो रहे हैं

    स्त्री-विमर्श और नारी-चेतना पर खोखली बहसें,

    फुला रहे हैं छाती, ठोक रहे हैं ख़ुद की ही पीठ

    मगर जान लीजिए

    आपकी स्त्री हँसती है

    आपके तमाम तमग़ों और मानपत्रों पर

    आपकी पीठ पीछे

    हमें कमज़ोर कहने से पहले

    अपनी क्षुद्र कामनाओं को धिक्कारिए जनाब

    हम स्त्रियों ने ही डाल रखी है

    आपकी सैद्धांतिक मर्दानगी और वहशीपन पर

    लाज और संकोच की चादर

    हमसे ढके रहते हैं आपके ज़ुल्म

    और घातक मूर्खताएँ पर्दे के भीतर

    हम बस देह भर ही तो नहीं

    हमे सिर्फ़ कमनीय सूरत

    और लचकती कमर का पर्याय मत समझिए

    संभव हो तो

    हमे एक बुद्धि, एक विचार

    एक मस्तिष्क के निकष पर आँकिए

    और स्वयं बताइए कि

    हम आपसे किस लिहाज़ से कमतर हैं!

    हम आपके अहंकारी और झूठे

    मर्दवादी ज़हर से नीली पड़ी औरतें हैं

    हमें अपना ज़हर आप चूस कर थूकने दीजिए

    ये दुनिया सिर्फ़ आपकी नहीं है

    हमें भी मन भर अपने मन से जीने दीजिए

    स्रोत :
    • रचनाकार : सपना भट्ट
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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