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हमरे गउँना में

hamre gaunna mein

नरेन्द्र कुमार

नरेन्द्र कुमार

हमरे गउँना में

नरेन्द्र कुमार

और अधिकनरेन्द्र कुमार

    कइसन सुराज नाहीं तनिको अजादी—

    हमरे गउँना में ना।

    लाग बाटइ अगिलहिया

    हमरे गउँना में ना॥

    बाबू के खातिर भरा बड़का बखरवा।

    हमका मोहाँल बाटे फटहा अंचरवा॥

    सूख बाटइ देहियाँ खटत दिन-रतिया

    हमरे गउँना में ना॥

    होत भिनसार रोज मलिका पुकारइ।

    खूनवाँ चूसत कबहूँ नाहीं इनकारइ॥

    मोछवा मुरेरइ तरेरइ दूनो अंखिया

    हमरे गउँना में ना॥

    ताने सीना पे बनुकिया

    हमरे गउँना में ना॥

    हमरी बसतिया मा पड़इ भुखमरिया|

    मुरगा-पुलाउ छनइ बड़की बखरिया॥

    हमका लिलार नाहीं कोदयी मकुनियाँ।

    हमरे गउँना में ना॥

    अब सोहाइ हमय बाबू के घुड़किया।

    अइसन गुलमियाँ से निकही जेहलिया॥

    अब हम तोरबइ पाँउ के जंजीरिया

    हमरे-गउँना में ना॥

    चढ़बइ मुकुति पहरिया

    हमरे गउँना में ना॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : अब होगी बरसात (पृष्ठ 58)
    • रचनाकार : नरेन्द्र कुमार
    • प्रकाशन : जन संस्कृति प्रकाशन
    • संस्करण : 1990

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