हमरा नहि चाही हिन्दू राष्ट्र
hamra nahi chahi hindu raashtr
हिन्दू राष्ट्रक परिकल्पना मात्रसँ
सिहरि जाइत अछि हमर आत्मा
डूबि जाइत छी जघन्य इतिहासमे
जाहिमे हमर पुरखा लोकनि सहने रहथि
नारकीय यातना
मनुक्ख रहितहुँ हुनका सभक संगे
कयल गेल रहनि जानवर जकाँ शोषण आ प्रताड़णा
खुटेसि देल गेल रहनि हुनका सभकेँ
धर्मक खुट्टासँ
अंत्यज कहि वर्णव्यवस्थाक पगहासँ
बान्हि देल गेल रहनि गरदनि
मनु संहितासँ नाथि क' छीनि लेल गेल रहनि
मनुक्ख होयबाक सभ अधिकार
धर्मग्रंथक गरदनिमे नीच जातिक ढोलना बान्हि
कयल गेल रहनि सामाजिक बहिष्कार
आब जखन एतेक मोसकिल, एतेक संघर्षसँ
भेलहुँ हेँ पुश्तैनी गुलामीसँ थोड़-बहुत आजाद
त' जातीय अहंकारसँ भरल संकीर्ण मानसिकता
बला लोकसभ
फेरसँ लाबय चाहैत छथि
वैह घृणित संस्कृति, वैह नृशंस सभ्यता
दोहराबय चाहैत छथि फेरसँ वैह जघन्य इतिहास
जाहिमे भरल रहैत छलैक दुनियाँ भरिक भेदभाव
काटल जाइत रहैत छलैक एकलव्यक औंठा
आ चलाओल जाइत छलैक शम्बूकक
गरदनिपर तरुआरि
ई सभ समाजिक सौहार्द्र आ सद्भावनामे
लगबय चाहैत छथि साम्प्रदायिक आणि
जखन कि एहि अगिलेसुआ सभकेँ बुझल छैक
आब नहि हैत कहिओ हमर हिन्दू राष्ट्रक सपना साकार
तइयो बेर-बेर मनुक्खताकेँ लतखुर्दनि करैत
शोषण-उत्पीड़न, अन्याय-अत्याचारपर आधारित
हिन्दू राष्ट्र लेल करैत रहैत छैक असफल प्रयास
जखन कि हमरा बहुजन सभकेँ पसिन अछि
सम्पूर्ण प्रभुत्वसंपन्न समाजवादी पंथ निरपेक्ष
लोकतंत्रात्मक गणराज्य
हमसभ वेद, धर्मग्रंथ, मनु संहितासँ शासित भ'
फेरसँ नहि बनय चाहैत छी गुलाम
हमरा सभकेँ नीक लगैत अछि
स्वतंत्रता, सामानता, बंधुता आ न्यायसँ भरल
बाबा भीमक संविधान!
- पुस्तक : प्रतिकार एखन बाँकी अछि (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 38)
- रचनाकार : रामकृष्ण परार्थी
- प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
- संस्करण : 2022
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