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हमारी नौका

hamari nauka

अनुवाद : श्यौराजसिंह जैन

गोरान बाबिच

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हमारी नौका

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    हमारी नौका “सांता मारिया डूब रही है...

    अपनी अंतिम घड़ी में सोच रहा हूँ इस बारे में

    क्यों तुमने क्रिस्टोफ़र कोलंबस

    क्यों तुमने अमरीका खोज निकाला?

    मैं तुम्हारे इस कृत्य को स्पष्ट नहीं कर पाता

    तुम हमें भी तो खोज सकते थे,

    बता सकते थे दुनिया को कि हम भी हैं,

    कैसी कृतज्ञता के भागी बनते

    कब से अमरीका हमारी बराबरी कर सकता है?

    तुमको, वास्तव में, मागेलानेस1 की तरह ही

    खा लिया जाना चाहिए था...

    कैसे यह हो गया

    कि तुम राजा की कृपा खो बैठे,

    तुम जिस पर ईश्वर की कृपा थी?

    और क्यों तुमने चुना भयंकर वर्ष 1492?

    मेरे जीवन में इस वर्ष का बड़ा रोल है,

    जब भी उसका ध्यान आता है

    तुम्हारा भी ध्यान आ जाता है

    और इसका उलटा।

    क्रिस्टोफ़र, दूसरे वर्षों के साथ यह बात नहीं!

    क्या तुमने स्त्रियों को प्यार किया था?

    क्या तुमने उन्हें अमरीका के स्वप्न दिखाए?

    क्या यह सही है कि इज़ाबेल सुंदर थी

    कि तुम्हें आधी रात के क़रीब बुलाती थी

    कि उसे नीले आसमान के नीचे सुनाओ

    पश्चिमी क्षेत्रों की भव्यता के बारे में?

    क्रिस्टोफ़र, तुमने वास्तव में अपना काम ढंग से किया,

    अपना काम जिसके लिए तुम्हें वेतन मिला था,

    और वह तो केवल साँसें भर रही थी...

    यह सोचते-सोचते मुझे भी इज़ाबेल से प्रेम हो गया,

    मुझे अनुभव नहीं इन बातों का,

    देखो तो, वह मुझसे पाँच सौ साल बड़ी है,

    और यह अंतर बहुत अधिक है, लोग भी हँसते,

    हालाँकि वह भी सुंदर है, सुंदर मैं भी हूँ...

    अब, देखते हो, कितना दुखी हूँ मैं।

    लोग सोचते हैं कि मैं मज़ाक कर रहा हूँ,

    कि मैं तुम्हें गंभीरतापूर्वक नहीं समझ रहा,

    क्रिस्टोफ़र, मैं समझ रहा हूँ तुम्हें अतिगंभीरतापूर्वक!

    तुम मेरे लिए प्रश्न हो निर्णायक महत्त्व के,

    मैंने तुमसे सालें गिनना शुरू किया है,

    मुझे अब भी आशा है कि तुम लौट आओगे

    जहाँ से कि आए थे!

    तुम्हारी वापिसी अन्यतम घटना होगी

    मानव-इतिहास में!

    सोचो तो ज़रा, मनुष्य जो सफल न हुआ!

    मैं तुम्हें, वास्तव में, सूचित कर सकता हूँ

    मूर्खों की बड़ी संख्या के बारे में

    जो तुम्हारे बाद आए,

    उन्होंने भी चमत्कार दिखाए,

    बनाई मशीनें, हवा, पानी, सूरज, आग

    केवल तुम्हीं ने धरती का आविष्कार किया,

    ताल2 भोला था

    नीचे3 की तरह ही

    (वे दोनों बहुत सरल बोले)

    और केवल तुम्हीं ने उन्हें समझा महासागर पर तैरते हुए

    जैसे कि गर्भ के आधार पर प्रागैतिहासिक पशुओं को

    विश्व तो, ये लो, चल रहे हैं,

    हम दैवत्व को पहुँच रहे हैं और मैं तुमसे अलग हो रहा हूँ

    क्रिस्टोफ़र, मैं तुमसे भाग रहा हूँ,

    लिए हुए सिर ज्यों तुम्हारा अंडा,

    रफ़्तार से जिसकी कि तुम कल्पना भी नहीं कर सकते

    मेरी अंधी आँख ने तुम्हारे जहाज़ को भेद दिया है

    जहाज़ डूबने लगा है जहाज़ी गा रहे हैं,

    इज़ाबेल रो रही है, आँसुओं से रूमाल भिगो रही है,

    उन दोनों को खोकर जिन्हें प्यार किया था...

    स्रोत :
    • पुस्तक : समकालीन यूगोस्लाव कविता-1 (पृष्ठ 190)
    • संपादक : श्यौराजसिंह जैन
    • रचनाकार : गोरान बाबिच
    • प्रकाशन : बाहरी पब्लिकेशंस, नई दिल्ली
    • संस्करण : 1978

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