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हमार गाँव प्यारा लगै

hamar gaanv pyara lagai

परवाना प्रतापगढ़ी

परवाना प्रतापगढ़ी

हमार गाँव प्यारा लगै

परवाना प्रतापगढ़ी

और अधिकपरवाना प्रतापगढ़ी

    हे बाबू ! मुड़ के निहारा, नदिया कै बहै धारा।

    हमार गाँव प्यारा लगै॥

    फुलवन कै बगिया तौ मनवा लुभावै,

    निक लागै कोयल जौ बोलिया सुनावै,

    मोरे धरती पै चन्दा सितारा, गँगा किनारा।

    हमार गाँव प्यारा लगै॥

    सावन झुलना, फागुन रँगना,

    गोरी कलइया गजब सोहय कँगना,

    पनघट कै देखि के नजारा, यहीं मन हारा।

    हमार गाँव प्यारा लगै॥

    नाचै किसनवा मगन खरिहनवा,

    बसंती बहार मोरे आवे अँगनवा,

    गमकै गली गलियारा, खुसहाल जग सारा

    हमार गाँव प्यारा लगै॥

    बउरै जौ अमवा महुलिया कै डरिया,

    मन्द-मन्द गन्ध मिलै डोलै बयरिया,

    लगावैं सबै केहू नारा, मइया के जय जयकारा।

    हमार गाँव प्यारा लगे॥

    गँउवा के कउन-कउन बतिया बखानी,

    परवाना गितिया सुनावै जुबानी,

    मथवा कै बिंदिया सितारा, भगावै अँधियारा

    हमार गाँव प्यारा लगै।

    स्रोत :
    • पुस्तक : रस गागरी (पृष्ठ 20)
    • रचनाकार : परवाना प्रतापगढ़ी
    • प्रकाशन : अभिव्यक्ति संगम, साहित्यिक संस्था, लालगंज प्रतापगढ़
    • संस्करण : 2013

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