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घरहूँ में घरी-छन छूमछाम से

gharhun mein ghari chhan chhumchham se

प्रकाश उदय

प्रकाश उदय

घरहूँ में घरी-छन छूमछाम से

प्रकाश उदय

और अधिकप्रकाश उदय

    दूनो हाथे दसो नोहा

    इहे अरज-निहोरा

    जनि लिलरा के टिकुली

    सटावऽ हो सिन्होरा

    धनि, आवते बहरवा से घूमघाम के

    रहऽ घरहूँ में घरी-छन छूमछाम से

    जे घर के घुटाँव

    जे मन के मुटाँव

    एगो तितिकी लगाँव

    भरि जिनिगी बुताँव

    अब ईहो सँपराई जा धूमधाम से

    रहऽ घरहूँ में घरी-छन छूमछाम से

    दुख सबके बाटे

    केहू काटे केहू ठाटे

    सुख थोरे, छितराइल—

    इहाँ उहाँ घाटे-घाटे

    चलऽ संगहीं बटोरे-बाँटे झूमझाम के

    रहऽ घरहूँ में घरी-छन छूमछाम से

    तुहूँ कहेलू कि तू

    तुहीं कहीं हमहूँ

    कहऽ भूल-चूक केहू—

    कहीं माने कबहूँ

    कवनो नेतवे ले लेते एहू तूमताम के

    रहऽ घरहूँ में घरी-छन छूमछाम से

    बल आपनो तहार

    भाई-भवध-इयार

    बल ऊख-रूख-पोखरा—

    पहाड़, बल इनार

    बल बाबा बजरंगी जी के लूमलाम के

    रहऽ घरहूँ में घरी-छन छूमछाम से

    केहू मानी भा ना मानी

    बाकी हमनी के बानीं

    जइसे जेठ के झवानी में

    बतासा अउरू पानी

    बोलीं बीर-पीर चदरा के चूमचाम के

    रहऽ घरहूँ में घरी-छन छूमछाम से

    जेही बोले से निहाल

    देखऽ बोले के कमाल

    बोले नइया के खेवइया

    हइया-हइया-हइया-हइया

    माने तनिको ना हार

    चाहे धार मँझधार

    अब हमनी के बारी

    हूक हलुका भा भारी

    हुलकेर दीं जा हुल्लेलेले हूमहाम के

    रहऽ घरहूँ में घरी-छन छूमछाम से

    स्रोत :
    • पुस्तक : अरज-निहोरा (पृष्ठ 31)
    • रचनाकार : प्रकाश उदय
    • प्रकाशन : राजकमल प्रकाशन
    • संस्करण : 2020

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