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एंथ्रोपोसीन जनित अवसाद गीत

enthroposin janit avsad geet

अनुवाद : देवेश पथ सारिया

ऐन वाल्डमेन

ऐन वाल्डमेन

एंथ्रोपोसीन जनित अवसाद गीत

ऐन वाल्डमेन

और अधिकऐन वाल्डमेन

    आवाज़ बेदख़ल करती है

    मौसम को

    और बरक़रार रहता है

    तुम्हारे लिए मेरा प्यार

    गाता है तुम्हारे लिए

    इन ‘नए मौसमों’ में

    जिन्हें ले आई है

    एंथ्रोपोसीन नाम की यह बला

    कुछ भी नहीं बचा

    जिसे इंसान ने

    बना लिया हो

    बंधक

    क्या हम प्रतिकार कर सकते हैं?

    क्या हम हार जाएँगे?

    अपने संसार को बचाने की लड़ाई?

    हम सपने देखते हैं

    अपनी ही क्षणभंगुर,

    टूटी हुई प्रतिकृतियों के

    एक रोबोट की तरह सीमित सोच वाली

    इस नए साल

    कहीं परछाईं से झाँकती है

    एक धूमिल-सी संभावना

    आँखें खोल लेने की

    पर क्या यह मुमकिन हो पाएगा?

    लगभग मानव जैसा दिखने वाला एक प्राणी

    जंगल से सहमा हुआ है

    उसका विकास अपेक्षा से धीमी गति से हो रहा है

    बल्कि वह रह गया है अपरिपक्व

    हम मानवों की ही तरह

    चलिए, शायद आपको महसूस हुआ

    इस माहौल का तनाव

    पर क्या आप तैयार हैं

    इस परिदृश्य को बदल देने को?

    जंगल ने आकार दिया बंदरों को

    और गुफाओं को और घास के मैदानों को :

    और मनुष्यों को

    और अब ऐसा क्या है

    जो साबित करेगा कि हम कुछ लचीले हो सकते हैं?

    मानवता से कुछ अधिक परिपूर्ण?

    जलवायु-परिवर्तन की मातमपुर्सी?

    अपनी दुनिया के विनाश पर

    हमारी बेहद कोमल प्रतिक्रिया मात्र?

    सवाल

    या कर्मठता?

    स्रोत :
    • पुस्तक : सदानीरा पत्रिका
    • संपादक : अविनाश मिश्र
    • रचनाकार : ऐन वाल्डमेन

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