एकिलीज़* के लिए

ekiliz*ke liye

सत्यम तिवारी

सत्यम तिवारी

एकिलीज़* के लिए

सत्यम तिवारी

और अधिकसत्यम तिवारी

     

    तुम्हारा दिल दाग़ और चेहरा घावों के बिना 
    नहीं बन सकता था
    अभिमान भरा हुआ था तुममें और अँधेरा
    कहीं नहीं ले जाकर छोड़ने की हद तक अँधेरा

    अरे! किस बात का महानतम योद्धा
    योद्धा और इतना दुस्साहसी
    यार तुम समूचे ग्रीस के महाराजा के सामने नहीं झुके
    पर अपनी नीचाइयों से उठने में 
    तुम्हें कितना वक़्त लग गया

    अगर तुम सचमुच जाहिल-गँवार होते
    तो तुम्हारी प्रेमिकाएँ तुम्हें माफ़ कर सकती थीं
    पर तुमने जान-बूझकर उनके ईश्वर को अपमानित किया
    तुम्हारी मानें तो देवता हमसे जलते हैं
    और नश्वरता पाने के लिए मरते हैं
    तुम कोई तो बात उनके मतलब की करते
    ख़ैर छोड़ो, देवताओं से मुझे भी कुछ कम शिकायत नहीं।

    लेकिन देवता या बग़ैर देवता के
    अंततः ट्रॉय पर फ़तह हासिल कर ली गई है
    वहाँ ख़ुशी है होमर को और ग्रीस को भी
    प्रजा को कम, राजा को अधिक
    एक स्त्री की इज़्ज़त को ढाल बनाकर
    पूरा का पूरा शहर फूँक दिया गया
    जैसे सचमुच ग्रीस में किसी औरत की क़द्र थी!

    एक बात पूछूँ, सच-सच बतलाना
    जब रात गए दिन अपनी मस्ती में चलता है
    तुम्हारी एड़ियों में तीर-सा तब क्या धँसता है?

    _______________

    * ग्रीस का महानतम योद्धा, होमर कृत 'इलियड' का एक चरित्र।

    स्रोत :
    • रचनाकार : सत्यम तिवारी
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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