एक अल्पकालिक उदासीनता सालती है मुझे
ek alpakalik udasinata salti hai mujhe
ऋषभ पाण्डेय
Rishabh Pandey
एक अल्पकालिक उदासीनता सालती है मुझे
ek alpakalik udasinata salti hai mujhe
Rishabh Pandey
ऋषभ पाण्डेय
और अधिकऋषभ पाण्डेय
भाषा के अकालग्रस्त मरुस्थल में
अब न शिकायतें बची हैं
न ही शब्द,
अधिकार और प्रेम के चमकदार
मोती मरुभूमि में खो से गए हैं
तुम्हारे हिस्से की बालुकाएँ गड़ने लगी हैं नासिकाओं में
एक गहरा उच्छ्वास,
प्राणवायु के मार्ग में अवरोध बना जाता है
एक अल्पकालिक उदासीनता स्नायुओं में
अक्सर किसी रेलगाड़ी की तरह
तेज़ी से भाग जाती है।
और फिर
एक थकी हुई आत्मा
वायुमंडल में सन्नाटा परोस रही है
मुझे लगता है तुम्हारे जाने का दुःख
जितना बोधगम्य है
उतना ही रचनात्मक
- रचनाकार : ऋषभ पाण्डेय
- प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित
Additional information available
Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.
About this sher
rare Unpublished content
This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.