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ड्राफ़्ट मेल

Draaft mel

रेणु मिश्रा

रेणु मिश्रा

ड्राफ़्ट मेल

रेणु मिश्रा

और अधिकरेणु मिश्रा

    मैंने उसकी यादों को

    अपने ज़ेहन में कॉपी कर रखा है

    मगर आज भी, उसे कहीं पेस्ट नहीं कर पाई

    अब तक सोच ही रही हूँ कि

    उन चीज़ों को कहाँ रख छोड़ा जाता है

    जिनके बारे में हम

    बात करने से भी कतराते हैं...

    उंगलियाँ फड़फड़ा रही हैं

    शायद दिल की बेचैनियाँ बता रही हैं

    मगर दिमाग़ है कि उलझा हुआ सोचता है

    कि क्लाउड के किस फोल्डर में उसे

    पेस्ट करूँ कि कुछ समय बाद

    वो मुझे इस तरह याद दिलाए कि

    'वन ईयर बैक, लुक एट योर मेमोरी'

    उंगलियाँ दुखने लगी हैं

    उसके संग बिताए पलों की ग्रैविटी से

    कि उसे पेस्ट कर दिया मैंने

    अपने जी-मेल के ड्राफ़्ट में

    जिन बातों को हम भूलना नहीं चाहते

    उन्हें इसी तरह हम

    दिल में ड्राफ़्ट करके छोड़ देते हैं

    इससे उंगलियाँ में तो हल्कापन है

    मगर दिल हो चुका है भारी!!

    स्रोत :
    • रचनाकार : रेणु मिश्रा
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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