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परबत से निकसी नयी नदी,

हयि धार तेज अउ टेढ़ी-मेढ़ि।

कसि ले पतवारु, उठाउ बाँसु,

मल्लाह, तनिकिउ चिंता करु

अपने राम के सहारे पर

यह चली जायि डगमग डोंगिया।

उठि कयि तउ देखु स्यकार भवा।

सबिता की लयि कयि भ्याँट दउरु।

यह बाल-अरुन की सोभा लखु,

किरनिन का चूमि अमर ह्वयि जा।

हाँ-हाँ, राम के सहारे पर

यह चली जायि डगमग डोंगिया।

यह फसिलि गुलाबी जाड़े की,

घर-भीतर तक बसंतु फूला;

बिन खिली कलिन की अरघानइँ

चोरी ते मन च्वरायि भाजइँ।

तुइ नाउ-न्यवारा खेलु,राम पर

चली जायि डगमग डोंगिया।

दूध की नदी अन्हवायि रही

परभातु समीरन पर पउढ़ा।

महतारी की कनिया मा कसि-कसि

कूदि-कूदि अनंदु भरि ले!

यितनयि राम के सहारे पर

यह चली चलयि डगमग डोंगिया।

जब ठीक दुपहरी फूलि रही,

तब चमाचम्मु सब देखि परयि—

हयि अउघटु घाटु गहिर पानी

मुलु तुइ तउ कसि कयि फ्याँट बाँधु।

रहि-रहि राम के सहारे पर

यह चली जायि डगमग डोंगिया।

बरसाती बादर घूमि रहे,

बिजुली चमकयि कउँधा लपकयि;

बूड़ा बाढ़इ भुइँ-चालु चलयि,

चलु देखि-देखि काँटु लगयि।

तोरे राम के सहारे पर,

यह चली जायि डगमग डोंगिया।

आसव के प्याला छलकि रहे,

तालन पर कँवला महकि रहे;

खिलि ले, खुलि ले, छकि ले, थकि ले,

मुलु तुइ जुआन, कुछु समुझि बूझि।

चलु–चलु राम के सहारे पर

यह चली जायि डगमग डोंगिया।

हरियरी किनारी, हरियरि सारी,

नद्दी-नरिया पहिंदे हयि।

बिरछिन की भरी जुआनी ते

सबु हरियर-हरियर चुआ परयि।

रसु ले राम के सहारे पर

यह चली जायि डगमग डोंगिया।

यह कामरूप की नगरी आयी

तुहिंका का तुइ काहे ड्यरु?

सबमा मिलिकयि सबते अलहिद

तुइ राम-राम का महारथी।

उयि पार देखु उयि पार देखु

हाँ, चली जायि डगमग डोंगिया।

नउका उइ बियावान पहुँची

जो ऊबड़-खाबड़ गंध-हीन।

भूतन का गड़बड़ देखि-देखि,

तुइ हँसि-हँसि दे छिन—भंगुर पर।

रटु राम-राम, रटु राम-राम,

तब चली जायि डगमग डोंगिया।

दिनकर तुर्रायि पछाँह अहा!

सोभा का सागरु उछरि रहा;

कस साँझ परी पखना फयिलाये

जलथल ऊपर नाचि रही।

राम का तमउ-गुनु-रूपु देखु,

बसि, चली जायि डगमग डोंगिया।

पानी बरफीला, पाला बरसयि

राति अँध्यरिया बनयि, रही,

तुइ तउ मतवाला माला लीन्हे,

आँखिन आँजे रतन जोति,

राम की दोहाई फूँकि-फूँकि

चलु चली जायि डगमग डोंगिया।

तुइ लिहे कमर किरपान राम की

अकरम गति पर का देखे!

कहूँ डोंगिया, कहूँ डबना

कहूँ मइँ हउँ, कहूँ तुइ हयि,

सबि राम-राम की माया की

यह चली जायि डगमग डोंगिया।

स्रोत :
  • पुस्तक : पढ़ीस ग्रंथावली (पृष्ठ 93)
  • संपादक : डॉ. रामविलास शर्मा, युक्तिभद्र दीक्षित
  • रचनाकार : बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'
  • प्रकाशन : उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ
  • संस्करण : 1998

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