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ढोलक की आवाज़

Dholak ki avaz

नूर आलम नूर

नूर आलम नूर

ढोलक की आवाज़

नूर आलम नूर

और अधिकनूर आलम नूर

    ढोलक की आवाज़

    और तुम्हारी याद

    अक्सर साथ-साथ आती है

    और जब भी आती है

    मेरी धड़कनों की गति अनायास बढ़ जाती है

    आज भी बढ़ रही है

    बिल्कुल वैसे ही

    जैसे बढ़ी थी पहली बार

    तुम्हारे ढोलक के पहले थाप पर

    तुम्हारे कंठ से निकले वो मधुर गीत

    मेरी धमनियों में अब भी ऑक्सीजन की तरह बह रहें हैं

    तुम्हारी मुस्कान

    बिल्कुल किसी गौरैये के बच्चे जैसी मासूम थी

    मुझे नहीं मालूम

    तुम्हारे इस मुस्कान के पीछे कितनी उम्मीदें दफ़्न थी

    कितनी नदियों ने इकठ्ठा किए होंगे तुमसे नमक

    और न ही ये जानता हूँ कि

    कितनी तितलियों के पास होंगे तुम्हारे पंख

    मैं तो इस बात से भी अनभिज्ञ हूँ की

    कौन थी तुम

    कहाँ से आईं थी

    क्या था तुम्हारा नाम?

    लेकिन

    तुम्हारे आँखों में चमकते हुए चाँद की चमक

    मेरे ज़ेहन में आज भी ज़िंदा है

    बिल्कुल वैसे ही जैसे रहता है आसमान

    किसी गिलहरी की आँखों में

    तुम कहाँ हो

    किस हालात में हो

    मैं अनजान हूँ इस बात से भी

    लेकिन मेरा तुम्हे मुड़-मुड़ के वापस देखना

    बख़ूबी याद है

    जो हज़ारों नहीं

    लाखों सवाल पैदा करता है मेरे ज़ेहन में

    ये जानते हुए

    कि नहीं मिलेगा मुझे कोई जवाब

    मैं एंटीलिया की दीवारों से पूछना चाहता हूँ

    तुम्हारे हक़ की रोटी के बारे में

    मैं पूछना चाहता हूँ

    लुटियन के गलियारों में चहकते आदमियों से

    तुम्हारे चेहरे पर बिखरी उदासी के बारे में

    मैं चाहता हूँ पूछना

    उस सात आसमानों के मालिक से

    क्या उसके पास है कोई

    तुम्हारे भविष्य के लिए योजना

    ये जानते हुए भी

    कि नहीं मिलेगा कोई जवाब

    मैं पूछना चाहता हूँ

    स्रोत :
    • रचनाकार : नूर आलम नूर
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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