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डेली पसिंजरी के गीत

Deli pasinjri ke geet

प्रकाश उदय

प्रकाश उदय

डेली पसिंजरी के गीत

प्रकाश उदय

और अधिकप्रकाश उदय

    अँइसे जनि अँइठीं

    कुछ घुसुकिए के बइठीं

    कहियो कामे आई दोसरा के देल जगहा

    तनी हो लीं आगा-पाछा

    मोरे बाबू भाई बाचा

    तहाँ कहहूँ में आई जहाँ परी परता

    जल्दीबाजी के जमाना

    छूटे ओरहन ताना

    कहूँ सुनले रहीं दुइए दिन के होला जतरा

    बाते-बाते मुँहाठोंठी

    खोदे खुनुस के खोंठी

    से जबरी पतरा में हेरे भदरा

    एगो गठरी बा माथे

    एगो ठठरी बा साथे

    चलीं हाथे-पाथे बाते में बिता लीं रहता

    केहू कहीं से अवइया

    केहू कहीं के जवइया

    कुछ बताईं-पूछीं गाँव-घर-आरे-पटना

    जइसे ईहे कि कल्हुइयाँ

    रउरो ओरिया परुए बुनिया

    आकि छाइए छुइए छने छितरइले बदरा

    केहू खइनी केहू बींड़ी

    केहू पीटी केहू पीही

    केहू बरिजे मानि लीं मना लीं मनवा

    बाकी देखीं जो अनेत

    धा के के लीं लपेट

    जे सँपरे ना, गा के सुना दीं गनवा

    (कि) अँइसे जनि अँइठीं

    कुछ घुसुकिए के बइठीं

    कहियो कामे आई दोसरा के देल जगहा

    स्रोत :
    • पुस्तक : अरज-निहोरा (पृष्ठ 78)
    • रचनाकार : प्रकाश उदय
    • प्रकाशन : राजकमल प्रकाशन
    • संस्करण : 2020

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