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देख सकेंगे

dekh sakenge

निकोलाई रेरिख

निकोलाई रेरिख

देख सकेंगे

निकोलाई रेरिख

और अधिकनिकोलाई रेरिख

    हम पवित्र चिन्ह ढूँढ़ने जा रहे हैं

    ख़ामोश और सावधान।

    लोग चल रहे हैं, हँस रहे हैं

    पीछे चलने के लिए कह रहे हैं

    असंतोष में कुछ लोग तेज़ चल रहे हैं

    और कुछ हमारे पास है वे छीनना चाहते हैं

    राहगीरों को मालूम नहीं—

    हम पवित्र चिन्ह ढूँढ़ने निकले हैं।

    धमकियाँ देने वाले हमें छोड़ आगे चल देंगे

    उन्हें बहुत काम करने को हैं

    पर हम ढूँढ़ते रहेंगे पवित्र चिन्ह

    किसी को मालूम नहीं

    कहाँ छोड़ गया है प्रभु अपने पवित्र चिन्ह।

    सबसे विश्वसनीय तो यही है

    वे रास्ते में स्तंभों पर होंगे

    या फूलों में

    या नदी की लहरों में।

    हमारा विचार है उन्हें ढूँढ़ा जा सकता है

    बादलों की मेहराबों में

    सूर्य के आलोक में

    चंद्रमा के उजाले में

    लीसे और अलाव की रोशनी में

    हम ढूँढ़ते रहेंगे पवित्र चिन्ह।

    हम बहुत समय से चलते रहे हैं

    ध्यान से देख रहे हैं

    हमारे पास से बहुत सारे लोग निकल चुके हैं

    हमें लगता है उन्हें ज्ञात है

    पवित्र चिन्ह ढूँढ़ने के आदेश।

    अँधेरा हो रहा है

    अपना रास्ता पहचानना कठिन हो रहा है।

    समझ नहीं रही हैं ये जगहें।

    कहाँ हो सकते हैं वे पवित्र चिन्ह?

    आज हम उन्हें शायद ढूँढ़ नहीं पाएँगे

    पर कल उजाला होगा,

    मैं जानता हूँ

    हम उन्हें देख सकेंगे।

    स्रोत :
    • पुस्तक : निकोलाई रेरिख की कविताएँ (पृष्ठ 11)
    • रचनाकार : निकोलाई रेरिख
    • प्रकाशन : रेरिख अध्ययन परिषद, नई दिल्ली
    • संस्करण : 1995

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