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दाग कहियो ने धोआइए

daag kahiyo ne dhoaiye

अशोक कुमार दत्त

अशोक कुमार दत्त

दाग कहियो ने धोआइए

अशोक कुमार दत्त

और अधिकअशोक कुमार दत्त

    कहियो तँ कुत्तोक दिन घुरै छै

    मरू मे सेहो बरखा होइ छै

    मुदा दाग कहियो ने धोआइए

    जे एक बेर माथ चढ़ैए

    मानल जे प्रियाकेँ तरहत्थी पर रखै छी

    सपनो मे हुनका याद करै छी

    मुदा, आदर्श वियाहक जखन बात चलैए

    तँ हुनका सँ किए मुँह फेरि लै छी?

    प्रिय परीक्षा मे देखावथि तेज अपन

    सुन्दरता देखाबय मोहजाल अपन

    दहेजक जिंजिरमे जकड़ल नारी भेल मूक

    हुनक नोर सुनाबय पिहानी अपन।

    सुनै छी कहियो पहाड़ो गलि जाएत

    मदमस्त जवानी सेहो ढलि जाएत

    मुदा एक बात पर हमरा होइए शक

    मिथिलासँ कहियो दहेजो हेठ होएत?

    स्रोत :
    • पुस्तक : झिझिरकोना (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 32)
    • रचनाकार : अशोक कुमार दत्त
    • प्रकाशन : शेखर प्रकाशन, पटना
    • संस्करण : 2017

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