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चुहल दास उर्फ़ बन्ने मियाँ!

chuhal daas urf banne miyan!

सुमन शेखर

सुमन शेखर

चुहल दास उर्फ़ बन्ने मियाँ!

सुमन शेखर

और अधिकसुमन शेखर

    तुमने देखी है अपनी ज़ुबान बन्ने मियाँ!

    कैसे अजीब और बेधड़क

    भड़कीले शब्द चुके हैं तुम्हारी ज़ुबान पर

    अश्लील, गंवार, पतीत के बहुत आगे से है शुरुआत तुम्हारी

    उतना लिखा भी नहीं जा सकता

    ये तुम्हारी ज़ुबान है बन्ने मियाँ!

    यहाँ की वहाँ-वहाँ, कहाँ-कहाँ फेंक रहे हो!

    वहाँ-वहाँ की यहाँ लाद लाते हो,

    बरस पड़ते हो जो सामने दिख पड़ता है

    क्या तुम असल में यही हो,

    जो छुपा था दशकों से तुम्हारे भीतर बन्ने मियाँ!

    अनकहे का समूचा अंतर्लोक स्वयं से भी छुपा गए थे क्या!

    इससे भी बात बनती

    लोगों को दुनिया-दुनिया में रो-चीख़कर

    कम से कमतर और नीच भी बता रहे हो!

    अपनों को, अपनी लिखाई को क्या दे रहे हो बन्ने मियाँ?

    ऐसा क्यों बोलते हो, ऐसा क्यों लिखते हो, ऐसा क्यों दिखते हो?

    राजधानी की हवा में झूठ का इतना विष घुला है क्या!

    आलोचना जिस दुनिया की

    उसी का निवाला चुपके-चुपके

    हँसते-बोलते चटकाते जा रहे हो!

    ख़ुद को हर कविता में हारा, सहा हुआ बता रहे हो

    यह क्या झूठ बाँच रहे हो बन्ने मियाँ!

    एक बात बताओ

    तुम लिखकर रात को चैन से सो पाते हो न!

    उस नींद का स्वाद कैसा होता है!

    दुनिया बुरी है तो हम भी अब बुरे ही हुए!

    बन्ने मियाँ, बुराई को बुराई कभी काट सकती है भला!

    बारूद के बदले मिसाइल चलाओगे तो लड़ाई बढ़ेगी

    मुद्दे बढ़ेंगे, ज़ख़्म बढ़ेंगे

    घाव पर मलहम लगानी थी

    तुम ज़्यादा से ज़्यादा घाव ही देते-खाते गए!

    ये कैसी गरिमा है बन्ने मियाँ!

    जहाँ पहल शब्दों से हो सकती थी

    तुमने उन शब्दों पर तीखे परमाणु बम का लेप मढ़ दिया?

    यहाँ भी बात बनी तो थाना-कोर्ट तक ख़ुद को घसीट लिया?

    लिखना, रोते हुए भावपूर्ण पढ़ना-बोलना

    और गहमा-गहमी से तुम्हारी यारी

    यह नई लत है न!

    क्या मुँह दिखाओगे

    जब यही शब्द तुम तक जाएगा घूमता हुआ,

    सोचा है कभी!

    या आदत पड़ चुकी है!

    क्योंकि, ब्रह्माँड में फेंका गया सब

    वापस आता है उसी रूप में

    दवा, दुआ और लानत भी, पुरखे कह गए हैं

    हाल ढूँढ रहे हो या

    चुहल बढ़ा रहे हो चुहल दास उर्फ़ बन्ने मियाँ?

    स्रोत :
    • रचनाकार : सुमन शेखर
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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