चींटियाँ

chintiyan

अजेय

अजेय

चींटियाँ

अजेय

और अधिकअजेय

    क़तार में सरपट दौड़ती चींटियाँ व्यस्त हैं

    इधर से उधर

    उधर से इधर

    लगातार मेहनत करती, ख़ुशहाल कल के लिए।

    इतनी भी फ़ुरसत नहीं

    कि हाल पूछ लें, कम से कम

    राह में मिलने वाले दोस्त-रिश्तेदार का

    बस ‘हलो’ कह कर आगे बढ़ जाती हैं

    कहीं चूक जाएँ कोई छोटा-सा अवसर

    भाग्योदय का।

    क़तार में सरपट दौडती चींटियाँ ख़बरदार हैं

    कि कभी भी कोई बड़ा-सा पैर

    धम्म से पड़ सकता है अचानक उन पर

    क्षण भर में टूट सकती है क़तार

    गड्ड-मड्ड हो सकते हैं बेहतर कल के सपने

    ढोनी पड़ सकती हैं अपने संबंधियों की लाशें

    सभी व्यस्त चींटियों को

    इधर से उधर,

    उधर से इधर।

    क़तार में सरपट दौड़ती चींटियाँ आश्वस्त हैं

    कि धीरे-धीरे पुनर्व्यवस्थित हो जाती है क़तार

    फिर से स्पष्ट होने लगते हैं सपने

    फिर से व्यस्त होने लगती हैं चींटियाँ

    सब कुछ भूल कर

    इधर से उधर

    उधर से इधर।

    क़तार में सरपट दौड़ती चींटियाँ

    कभी-कभी बहुत सुंदर दिखती हैं।

    स्रोत :
    • रचनाकार : अजेय
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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