औरों की तरह नहीं

शलभ श्रीराम सिंह

औरों की तरह नहीं

शलभ श्रीराम सिंह

और अधिकशलभ श्रीराम सिंह

    अपने पिता की तरह कैसे कर सकता हूँ प्यार मैं?

    अपने भाई की तरह कैसे?

    कैसे कर सकता हूँ प्यार अपने पुत्र की तरह?

    मित्र की तरह कैसे?

    कैसे किसी ऐसे व्यक्ति की तरह जो नहीं हूँ मैं?

    स्त्रियों से किया गया प्यार

    वासना की ओर ले गया है मुझे हमेशा

    वनस्पतियों से किया गया प्यार

    उच्चाटन की ओर।

    पक्षियों से जब-जब किया है प्यार मैंने

    चुप्पी का शिकार हो गया हूँ अक्सर

    फूलों के बीच लगभग अन्हरा गई हैं मेरी आँखें

    पशुओं से मिलकर सतर्क हो गया हूँ ज़रूरत से ज़्यादह

    कहाँ कर सका हूँ प्यार मैं औरों की तरह किताबों से।

    किताबें

    बेचैनी के दौरान

    पीठ पर रखी आत्मीय हथेली की तरह लगी हैं मुझे

    दूसरे दे आते हैं उन्हें परचून की दूकान पर बेधड़क

    औरों की तरह नहीं कर सका हूँ प्यार मैं कभी।

    स्रोत :
    • पुस्तक : उन हाथों से परिचित हूँ मैं (पृष्ठ 86)
    • रचनाकार : शलभ श्रीराम सिंह
    • प्रकाशन : रामकृष्ण प्रकाशन
    • संस्करण : 1993

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