जुमलों के अंबार, दो करोड़ रोजगार
बाँटि दिहा हर साल, बोला अउर का करीं?
पंद्रह लाख पाइ गयो, खाता गरुआइ गयो
जिया हरसाइ गयो, बोला अउर का करीं?
तीन सत्तर कसमीर, बदल दिया तस्बीर
मिया के जिया में पीर, बोला अउर का करीं?
हिंदू राज लाइ दिया, नफरत बढ़ाइ दिया
दंगा करवाई दिया, बोला अउर का करीं?
नोटबंदी लाइ दिया, लाइन लगवाइ दिया
देस के रुलाइ दिया, बोला अउर का करीं?
हवाई अड्डा, रेल बेंचा, पेट्रोल तेल बेंचा
बेल भेल सेल बेंचा, बोला अउर का करीं?
रामराज लाइ दिया, मंदिर बनवाइ दिया
अजोध्या सजाइ दिया, बोला अउर का करीं?
भारत अउर पाकिस्तान, हिंदू अउ मुसलमान
देस भर में घमासान बोला अउर का करीं?
सीएए, एनआरसी वार, खूब भई तकरार
साहीन बाग के मझार, बोला अउर का करीं?
जीएसटी लगाइ दिया, बैंक बिकवा दिया
नीरव के भगाइ दिया, बोला अउर का करीं?
दंगे करवाए खूब, बंदे मरवाए खूब
कहर बरपाए खूब, बोला अउर का करीं?
आइन जब कोरोना माई, लाकडाउन लगवाई
तड़पै मजूर भाई, बोला अउर का करीं?
अंबानी से मिलजुल, पास भ किसान बिल
पूँजीवाद गवा खिल, बोला अउर का करीं?
झेलता किसान मार अउर पानी बौछार
आँसू गैस के प्रहार, बोला अउर का करीं?
धरती हमार अहै, कण कण से प्यार अहै
पूछै वाले कौन तुम? बोला अउर का करीं ?
सुन लेव ललकार, टूटि जाई अहंकार
पूछबै तब सरकार, बोला अउर का करीं?
- पुस्तक : अलगौझी (पृष्ठ 62)
- रचनाकार : मोहनलाल यादव
- प्रकाशन : हंस प्रकाशन, नई दिल्ली
- संस्करण : 2023
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