भुखमरों के देश के ओ आत्मपोषक, देवताओ!
bhukhamron ke desh ke o atmposhak, devtao!
उदय प्रताप सिंह
Uday Pratap Singh
भुखमरों के देश के ओ आत्मपोषक, देवताओ!
bhukhamron ke desh ke o atmposhak, devtao!
Uday Pratap Singh
उदय प्रताप सिंह
और अधिकउदय प्रताप सिंह
है तुम्हारी आँख में पानी अगर तो यह बताओ,
झूठ के बल पर तुम्हारा देश कितने दिन चलेगा?
यों कमी छोड़ी नहीं इतिहास ने भी
नित्य अपने आपको दुहरा रहा है
लड़ रहे जयचंद पृथ्वीराज दोनों
और सारा देश डूबा जा रहा है।
गाय की क़ीमत अधिक है आदमी से
लक्ष्य उनका आज चूका जा रहा है
बैर शोधन के लिए जयचंद आतुर
मौत भी अपनी स्वयं बुलवा रहा है।
बुद्धिमानो कुछ सबक़ सीखो विगत से
ग़लतियों से जानवर तक सीखते हैं
बैल में आकंठ डूबे रहनुमाओ
आदमी सचमुच अपाहिज दीखते हैं।
बैर में आंकठ डूबे रहनुमाओ
फिर महाभारत न भारत में मचाओ
पूर्व ही जो नष्ट है वह शेष कितने दिन चलेगा
झूठ के बल पर तुम्हारा देश कितने दिन चलेगा
- रचनाकार : उदय प्रताप सिंह
- प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित
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