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भोर से पहले विदा

bhor se pahle vida

अनुवाद : सुरेश सलिल

नाकानो शिगेहारु

नाकानो शिगेहारु

भोर से पहले विदा

नाकानो शिगेहारु

और अधिकनाकानो शिगेहारु

    हमारे पास करने को काम है

    उसे शुरू करने के लिए हमें सलाह-मश्विरा करना चाहिए

    लेकिन अगर हम वैसा करते हैं

    तो पुलिस आती है और मुँह-ही-मुँह थुरने लग जाती है।

    लिहाज़ा पिछवाड़े की गली

    और भागने के रास्ते को नज़र में रखते हुए

    हम ऊपरी मंज़िल के इस कमरे में आए—

    यहाँ छह नौजवान सो रहे हैं

    और नीचे एक दंपत्ति उसका बच्चा।

    इन छहों की पिछली ज़िंदगी के बारे में मैं कुछ नहीं जानता

    सिवा इसके कि वे मेरी ही तरह सोचते हैं।

    नीचे के उन तीनों प्राणियों के नाम भी मुझे नहीं मालूम,

    हाँ, इतना ज़रूर पता है

    कि अपना यह ऊपर का कमरा उन्होंने

    ख़ुशी-ख़ुशी किराए पर चढ़ाया है।

    भोर में किसी भी पल चल पड़ने के लिए

    हमारे झोले तैयार हैं—

    एक गुप्त मीटिंग होगी, और हमारा काम

    रफ़्ता-रफ़्ता चल निकलेगा।

    कल फिर सोना होगा कहीं, किराए के कंबलों में।

    भोर के लिए अभी से विदा!

    विदा, नन्हें कमरे,

    रास्ते की झपकियो, विदा!...

    नंगी और धुँधली रोशनी,

    सेलुलाइड के खिलौनो,

    किराए के कंबलो,

    खटमलो,

    विदा!

    तुम सबको विदा!

    हमारे विचार,

    उस दंपत्ति के और उस

    शिशु के विचार

    फूट उठें

    अकस्मात्—अबाध!

    स्रोत :
    • पुस्तक : रोशनी की खिड़कियाँ (पृष्ठ 182)
    • रचनाकार : नाकानो शिगेहारु
    • प्रकाशन : मेधा बुक्स
    • संस्करण : 2003

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