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देश पर दस दोहा

desh par das doha

तैयब हुसैन पीड़ित

तैयब हुसैन पीड़ित

देश पर दस दोहा

तैयब हुसैन पीड़ित

और अधिकतैयब हुसैन पीड़ित

    जे जनता से जात बा, लेत आँख बा फेर

    कइसन उल्टा फर रहल, आपन रोपल पेड़

    ना देशे में अन्न बा, ना कपड़ा, ना मकान

    अखबारन में छप रहल, भारत देश महान

    एक कम्पनी कर गइल दू सौ साल गुलाम

    अब कम्पनी सैकड़न, मस्जिद में राम

    कहाँ निशाना बा सधल, होता कवन शिकार

    ईश्वर-अल्ला एक ही, बन्दा में तकरार

    जेकरा दल में ना खुदे लोकतंत्र के नाम

    ओही श्वान के पास बा, लोकतंत्र के चाम

    हर करिया करतूत बा जेकरा घुट्टी आज

    उहे बोलावत फिर रहल, नैतिकता के राज

    करिया से नफरत करे जवन गोर तहजीब

    हम करियन के देश में संस्कृति उहे करीब

    सवासेर गेंहू जहाँ दे ना सकल सन्तान

    विश्व बैंक के करज का दी हिन्दुस्तान?

    नारी के पूजा कहाँ? कहाँ देव के वास?

    उहे वर्ण, नारी-दहन, मनुज-मनुज के दास

    गलत किताबन में इहाँ होत सही के खोज

    कइसन हठयोग ह! कइसन बा लोग

    स्रोत :
    • पुस्तक : अनसोहातो (कविता-संग्रह) (पृष्ठ 29)
    • रचनाकार : तैयब हुसैन पीड़ित
    • प्रकाशन : शब्द संसार, पटना
    • संस्करण : 2011

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