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बारिश वाली...एक कप चाय

barish vali. . . ek kap chaay

मनीषा

मनीषा

बारिश वाली...एक कप चाय

मनीषा

और अधिकमनीषा

    Gen Z के ज़माने में...

    90s वाले कुछ ख़्वाबा चाहिए॥

    5G के ज़माने में...International video calling नहीं...

    अपनों के ज़्बातों से भरे ख़त...

    और उस ख़त को लाते हुए डाकिए का इंतज़ार चाहिए॥

    जो भीड़ में भी अकेला कर दे

    इस reels के ज़माने में...

    Instagram और Facebook पर दुआएँ देता हुआ

    दिखावा नहीं...

    एक-दूसरे के घर जाकर ख़ुशियाँ बाँटने वाले अपनों का

    प्यार चाहिए॥

    अब तो असमान में तारे भी करते हैं शिकायत...

    क्यूँकि अब AC के ज़माने में भी...

    जो उन्हें ताकते हुए नींद में खो जाए...

    उन्हे भी अब ऐसा इंसान चाहिए।

    और अब तो मैं भी सोचती हूँ...

    क्यूँकि अब मुझे भी भागती हुई इस Metro वाली

    ज़िंदगी...भीग कर office जाने का डर नही...

    बारीश में भीगती मैं...और एक कप अदरक वाली चाय चाहिए॥

    स्रोत :
    • रचनाकार : मनीषा
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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