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बाँचल रहत गाम

banchal raht gaam

आनन्द मोहन झा

आनन्द मोहन झा

बाँचल रहत गाम

आनन्द मोहन झा

और अधिकआनन्द मोहन झा

    ताकि रहला अछि गाम

    मुदा भेंट नहि रहलन्हि हुनका

    कतहुँ गाम

    कहला जे

    नहि बाँचल अछि आब गाम

    बदलि गेल अछि शहरमे

    कहाँ छैक कतहुँ टटघर

    एकचारी पर लतरल तिलकोरक लत्ती

    कान्ह पर हर नेने

    बाध दीस जाइत जन-बोनिहार सभ

    खत्ता-खुत्तीमे बंशी खेलाइत नेना-भुटका

    साँझ-पराती गबैत स्त्रिगण

    धूर तपैत बुरहा सभ

    एहन बहुत किछु

    जे छल पहिचान गामक

    आब कहाँ अमरैत अछि कतहुँ

    एहि सभक अभावमे

    कोना परिभाषित होयत गाम

    मुदा की गामक पहिचान एतबे धरि?

    गाम मोहताज अछि एहि सबूत सभक

    कदापि नहि

    गामक अर्थ अतेक संकुचित नहि

    गाम एक गोट संस्कृतिक नाम थिक

    अभावमे प्रसन्न रहबाक

    जीवन कौशलक नाम थिक

    सुख दुखमे संग रहैत

    सरलता, सहजता आपेकताक नाम थिक गाम

    दसक लाठी एककेँ बोझ

    एहि सहयोगक नाम थिक गाम

    अतिथि देवो भवः

    एहि जीवन दर्शनक नाम थिक गाम

    तैं जा धरि लोक चिन्ह रहलैक लोककेँ

    जा धरि बाँचल छैक सिनेह सहयोग

    देहमे माटिक गन्ध

    अपन बोली भाषा

    बाँचल रहत गाम

    नव परिधानमे नव कलेवरमे

    मुदा पुरने परिचयक संग

    अबस्से बाँचल रहत गाम

    स्रोत :
    • पुस्तक : ई नहि थिक हमर प्रार्थना (पृष्ठ 118)
    • रचनाकार : आनन्द मोहन झा
    • प्रकाशन : नवारम्भ, मधुबनी/पटना
    • संस्करण : 2020

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