बच्चों के अस्पताल में
bachchon ke aspatal mein
...तो अब टाँग-रहित बालक को
सम्मानित अतिथि के सम्मुख प्रदर्शित करनी चाहिए
बैसाखियों के सहारे चल पाने की अपनी दक्षता!
नर्स हालाँकि कुनमुनाती है :
‘अभी उसे इसकी आदत नहीं पड़ी,’
किंतु राजकुमारी जी जब इस क़दर उत्सुक हों
तो ऐसी छोटी-मोटी आपत्तियों का भला क्या मतलब!
आओ, टॉमी, वार्ड के इस सिरे से उस सिरे तक
जोख़िम-भरे कुछ डग भरकर दिखाओ!
…फिर महामहिम राजकुमारी
सिर थपथपा कर तुम्हें शाबाशी देंगी, और—
और उसके बाद तुम्हें महसूस होगा कि
ज़िंदगी की मुश्किलें कितनी छोटी हो गई हैं।
यक़ीन मानो, अगर एक जोड़ा टाँगे खोकर भी
इतना बड़ा सम्मान हासिल किया जा सके
तो वह महँगा सौदा नहीं है।
जब तुम पाओगो कि तुम्हें इस बड़प्पन से लदा देख
बाक़ी सारे बच्चे किस तरह ईर्ष्या से भर उठे हैं
तो तुम ख़ुशी से लबालब हो उठोगो!...
लेकिन, क्या फ़र्श पर बजती तुम्हारी बैसाखियों की ‘खट्-खट्’ आवाज़
राजकुमारी की खोपड़ी में आगे भी घुमड़ती रहेगी?...
- पुस्तक : रोशनी की खिड़कियाँ (पृष्ठ 119)
- रचनाकार : ह्यु मैक्डायर्मिड
- प्रकाशन : मेधा बुक्स
- संस्करण : 2003
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