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बाप-3

baap 3

श्याम दरिहरे

और अधिकश्याम दरिहरे

    की कहलहुँ?

    नहि छिअनि जनैत हमरा बापकेँ अहाँ?

    नहि सुनल अछि हुनकर नाम?

    आहिरेब्बा!

    से तँ सुपते किने

    अहाँ किए चिन्हबनि हुनका!

    हुनका नामपर छैक

    एकोटा पार्क कि सड़क

    चौक कि पुल

    ने कतहु पथरायल मूर्ति छनि गाड़ल

    ने हुनका नाममे कोनो नेताक

    नांगरिए छलनि लागल

    ने माननीय महामहिम

    बनि जयबाक छलनि लूरि

    ने जेबकतरा भऽ सकलाह

    ने बटमार।

    रहरहाँ हुसि जाइत छलाह

    जोगाड़ टेक्नोलॉजीक विद्यामे।

    अपन बापे सनक सनकी सेहो छलाह।

    हुनकर बापो

    जमीन-जत्था रहथिन देने बेचि

    आजादीक खुशफहमीमे

    एकटा सेनानी पेंशन धरि लेल

    पड़ैत रहलनि भाम्ही

    अवसरक दोहन करबाक बदला

    अगुरबानेक परम्परा रहलनि

    सबदिन खनदानी।

    भाषण धुरझार

    बुधिआ काल पछुआर।

    तकर भोगबो कयलनि बेस दुर्गति

    तैओ नहि सिखलनि कोनो अवगति।

    डारि चुकल बानर जकाँ सबदिन

    छहोछित भेल गुम्हरैत रहलाह

    ने अप्पन कयलनि भला

    ने पापीएकेँ बरजि सकलाह।

    महतमाक बानर बनबाक बदला

    जँ उठौने रहितथि हुनके कुकुरमारा डांग

    तँ आइ दोसर रंगक देश होइत

    अहूँ चिन्हि जइतहुँ हमरा बापकेँ झट दऽ

    ने हुनके अगबे क्लेश होइतए।

    स्रोत :
    • पुस्तक : क्षमा करब हे महाकवि [मैथिली कविता-संग्रह] (पृष्ठ 17)
    • रचनाकार : श्याम दरिहरे
    • प्रकाशन : नवारंभ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2016

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