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बाप-2

baap 2

श्याम दरिहरे

और अधिकश्याम दरिहरे

    बाप हमर उघलखिन जिनगी भरि

    झंडा वामपंथी।

    बाप हमर बुझलखिन वैहटा पंथ

    वैह टा ग्रंथ

    एकेटा औजार—हँसुआ

    एकेटा अन्न—गहुम

    भतीजा नेता छलखिन

    भतीजा सांसद भेलखिन

    भतीजा देश

    भतीजा राजनीति

    ने आगु

    ने पाछु

    ने मध्य

    ने दहीन।

    भतीजा लेल बेहाल रहथिन

    भोट खसाबय लाठीक संग जाथिन

    जेना ओहीसँ मारथिन ठप्पा मतपत्रपर

    मुट्ठीमे जान

    भोगियाके जिताबऽमे प्राण

    फूसक खोपड़ीमे निवास

    अयाची मिसरक बराबरि चास।

    इन्निरा आवासक जोजनामे

    पहिलबेर पक्का घरक आस जगलनि

    मुदा सांसद भातिज कहलखिन जे

    बड़का लेल नै छै

    जोजना।

    पहिलबेर भेटलनि हमरा बापकेँ

    तीनटा अभिज्ञान

    जे सर्वहारा नै बड़का छथि

    भारतीय वर्ग संघर्ष

    होइ छै केहन

    कते अद्भुत छै

    अंबेदकर रचित संविधान।

    तें की?

    तैओ हुनकर उत्साह कम नै भेलनि

    कहलखिन—

    संविधाने गड़बड़ छै

    भोगिया की करतइ!

    बादमे अएलइ आर कतेको जोजना

    हमरा बापकेँ एकोटा भेटितनि कोना

    भोगी झाकेँ केओ

    कक्का-भतीजावाद वला कहनि

    से कोना सुनितथि

    हुनका दिस केओ उठबनि आँगुर

    से कोना सहितथि!

    भऽ गेलनि ओहिना समय पार

    भुखले पेटे, नंगटे देहे

    उतरि गेलाह वैतरणीक धार

    जपिते गेलाह मंत्र

    जय हो पाटी!

    जय हो देश महान!!

    जय हो देशक संविधान।

    स्रोत :
    • पुस्तक : क्षमा करब हे महाकवि [मैथिली कविता-संग्रह] (पृष्ठ 15)
    • रचनाकार : श्याम दरिहरे
    • प्रकाशन : नवारंभ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2016

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