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आत्मघाती

atmaghati

लेओनिदास लामबोरगीनी

और अधिकलेओनिदास लामबोरगीनी

    उसकी तरह जिसने देखा

    कूदते, आत्मघाती को

    मेट्रो की पटरी पर :

    और गुज़र गई झम से एक छलाँग

    उसके मस्तिष्क के शून्य से।

    उसकी तरह जिसने देखा

    उस बेचैन सहमे से आदमी को

    प्लेटफ़ार्म पर कूदते

    अंज़ाम देते अपनी मौत को।

    और गुज़र गई झम से एक छलाँग

    उसके मस्तिष्क के शून्य से।

    उसकी तरह जिसने देखा

    आदमी को सर पकड़े

    प्लेटफ़ार्म पर

    सहमा हुआ बेचैन और

    —फिर—अंज़ाम देते अपनी मौत को

    लगाते वह छलाँग;

    उसी की तरह,

    हाँ उसी की तरह

    गुज़र गई झम से एक छलाँग

    उसके मस्तिष्क के शून्य से।

    स्रोत :
    • पुस्तक : यह संपन्नता बिखरी हुई (पृष्ठ 239)
    • संपादक : श्यामा प्रसाद गांगुली, मीनाक्षी संद्रियाल
    • रचनाकार : कवि के साथ अनुवादक श्यामा प्रसाद गांगुली, मीनाक्षी संद्रियाल
    • प्रकाशन : साहित्य अकादेमी एवं ग्रूलाक
    • संस्करण : 2006

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