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अन्य पुरुष

anya purush

अमित उपमन्यु

अमित उपमन्यु

अन्य पुरुष

अमित उपमन्यु

और अधिकअमित उपमन्यु

    मैं चूमता हूँ प्रेयसी के होठों को

    महसूस करता हूँ प्रेम का आध्यात्म

    आलिंगन करता हूँ

    और ठीक उसी वक़्त

    दस मीटर दूर पार्क की एक बेंच पर बैठा

    देख रहा होता हूँ इस प्रेम को निर्वात में स्थान घेरते हुए।

    मैं कहीं पहुँचने के लिए रेलवे स्टेशन पहुँचता हूँ

    जहाँ भारतीय रेल मेरा स्वागत करती है।

    मैं ट्रेन के दो खुले दरवाज़ों के बीच खड़ा गति को महसूस करता हूँ

    (सद्गति?)

    मेरे पास खड़ा एक जवान लड़का

    गति से लड़ने दरवाज़े से छलाँग लगा देता है

    (दुर्गति?)

    उसका भी भारतीय रेल ने स्वागत किया था

    उसने स्वागत अस्वीकार कर दिया

    गति से लड़कर अब वह प्रथम पुरुष है

    जो चीख़ रहे हैं, रो रहे हैं, चिंतित हैं

    वे सब द्वितीय पुरुष हैं

    मैं अन्य पुरुष हूँ।

    मैं टी.वी. देखता हूँ

    लोग मर रहे हैं

    हत्याएँ हैं

    बलात्कार हैं

    आंदोलन हैं...

    मैं खाना खाते हुए टी.वी. देखता हूँ

    लूट है

    भ्रष्टाचार है

    घोटाले हैं...

    खाना ख़त्म हो जाता है

    मैं टी.वी. बंद कर सो जाता हूँ

    मैं और टी.वी.

    हम दोनों अन्य पुरुष हैं।

    सड़क के बीचों-बीच खड़ा

    निश्चल तन-मन

    मैं एक साथ महसूस करता हूँ विपरीत दिशाओं में सनसनाती गति को

    (असंगति?)

    प्रथम या द्वितीय पुरुष होने की असीम संभावनाओं के बीच भी

    मैं अन्य पुरुष हूँ।

    स्रोत :
    • रचनाकार : अमित उपमन्यु
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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