ग्रीष्मकालीन विस्तृत पहाड़ियों पर
मैं नियुक्त करूँगा मातृवत् सूर्य :
कि अपनी प्रदीर्घ अवनत किरनों के साथ तुम्हें खींच लाए।
घाटियों की मंद उछाल, नंगे खेतों पर
आकाशगंगा की झिलमिल बिखेरती, तरंगित
करेगी एक बार फिर संयोग के गान।
तुम मिलोगी मुझे समयातीत पृथ्वी की परछाई-तले
ऋतुएँ बुनता हुआ जहाँ मैं लेटा हूँ।
अपने सगोत्रियों के झूमते नृत्यों में मग्न होगी तुम
सिंफ़नीयुक्त, बांसुरियों की, लय के साथ
कुमुदिनियों को पहचानविहीन करते हुए।
मैंने खोल दिए हैं पर्वतीय द्वार
ताकि रुवेंज़ोरी पर्वत-समूह का भव्य किनारा
तुम्हारा प्रतिरूप चुरा ले।
महादेशों के बुदबुदाते अधर भी (लीबिया की चौकस हथेलियों तक)
लंबी अवधि से उपेक्षित पीढ़ी को सतर्क कर देंगे।
जंबेज़ी नदी का काँपता जलाशय
अपनी रुपहली चादर पर खेएगा तुम्हारा नाम
सागर की अनुगूँज तक उसे ले जाते हुए।
अकेले मुझे अपने को प्यार न करने दो,
ऐसा न हो कि तुम्हारे अस्तित्व का आसव
मेरी जीभ को जकड़ ले—सराहना के लिए
जब तुम बहुत सारे लोगों की गिनती कर रही हो।
- पुस्तक : रोशनी की खिड़कियाँ (पृष्ठ 393)
- रचनाकार : मैज़िसी कुनेने
- प्रकाशन : मेधा बुक्स
- संस्करण : 2003
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