अनाम प्रेमिकाक नाम
anam premikak naam
प्रिये! हम बसात पर नै पठाएब अहाँ के पाती
नै लीखब पानिक रेत पर अहाँक नाम
किन्नौ नै बसाएब बालुक ढूह पर
अपन अहाँक गाम
हम कहाँ ताकब प्रिये!
अहाँ के
अतर-फुलेलक गढ़हल बासमे
आकि कनैलक मादक-भरमाह माहुर बसातमे
हम नै अहाँ के बेर-बेर हेरब
हेरिते रहब
फुलाएल मटरक फूल, मकैक माँजरि
आकि
बासमतीक मह-मह चासमे
निहारब अहाँक छवि
फुलाएल अमलतासमे, पलासमे
हम कहाँ ताकब प्रिये!
कोनो संगीत
अहाँक पाजेबक रूनझुनमे
हमरा त' भेटैए
बान्हल सभ संगीत
बरदक गराक घंटीक टुन-टुनमे
बहुतोक ध्यान त' अँटकल छै
लिपस्टिकी ठोर पर
हमर मोन त' टाङल-ऐ फल्गू बनल नोर पर
बिना काजरक आँखिक कोर पर
प्रिये! नै मोन पड़ैए कौखन
रूपकथाक कोनो फुलकुम्मरिक सुकुमार्य
आकि बड़केशी रानीक
केशक अकार-सिङार
हमर सुरता आ सुमारमे त’ अबैए
गोइठा-करसीक
सार्थक-सोन्हाइन
गंध स' बासल देह
पताइत कंठक लगनी स' निनादित
आकि कामहि पड़ल चूल्हि-चिनबार
आशा-निराशाक जलडिंगा खेलाइत
मोसिमक पासा फेकैत
अपन गाम आ जिला-जेबार
प्रिये!
प्रेमक कोनो देह नै होइ छै
ओ त' अखंडित गेह छियै
जकर छियै असीम सगर संसार
मुदा अपने विदेह छियै
प्रेमक नै होइ छै कोनो रूप-गंध आ राग
प्रेम छियै केवट आ शबरीक अनुराग
प्रेम नै तकै छै
दुर्योधनक छप्पन परकार
प्रेम तकै छै
विदुरक बटलोहीमे चिहुटल साग
हम कहाँ भेटब अहाँ के
कोनो भव्य भवनक भीतर
सोफामे धँसल
बाझल
चौपाड़ि आकि रम्मी-तासमे
हँ, अलबत्ता भेटि सकै छी हम
बाझल
केसौर आकि कासमे
हम त' भेटब अहाँ के
अपसियाँत
जरैत आकि ठिठुरैत
धरतीक कोरमे
गामक पोर-पोरमे
जत' भेटत अहाँ के
हमरे सन
नाङट-अधनाङट
भूखल आ अधपेटा
करोड़क-करोड़ किसान आ मजूरक बेटा
आ भेटि सकै छी हम
तकरे करमानमे
सार्थक सृजनक असली करताइत
लागनिक रेख स' लिखाइत
सृजनक मूर्त अनगढ़ कथा आ तकरे गबाह बन
सहमत आकि सङबाह बनल
प्रिये!
भेटि सकै छी हम
अहाँ हमरा ओतौ हेरब
अहाँ हमरा ओतौ टेरब
सपनामे सिहाबैए नव जोतक बनोतरी
अकार-बेहबार
हमर समस्त आस्थाक केन्द्र
महातीर्थ रेणु सन इ खेत-पथार
सभ स' पावन लगैए हमरा
अपन गाम द' हाली बहैत
कमलाक धार
हमरा लगैए सभ स' परिचित
धूरामे ओंघराइत
बगरा जेकाँ लोटाइत
आकि सुखाएल चौर कि
पोखरिक पांक पर गोढ़नी कीरी सन ससरैत
सह-सह करैत
आकि मरुआक बिरारमे
फतिंगाक पाछू दौड़ैत
कार्तिक-गणेशक हेर
जकर ने कोनो फाँटल धरती
ने आसमान छै
ने सूरुज ने चान छै
ने कियो अपन सन, ने आन छै
एगो साबुत
निश्छल जहान छै
कलमबाग, महुवाक टोक, सिसबोनी,
आ जामुनक कतार
लगैए हमरा सभ स' अपन आ
चिनहार
हाटक बाटक कातमे लागल कंसार
कमलदाहा, रतन सागर आ गाछी पोखरिक मोहार
आ ओइ पर सुखाइत
धोबिघट्टाक कपड़ाक
इन्द्रधनुषी पसार
प्रिये! सांचे भेटैए हमरा
जिनगीक सभ स्पन्दन
जीबाक ऊर्जा
परातीक तानमे
चैती-बारहमासाक गानमे
नै गायब हम नैराश्य गीत
किन्नौ नै
हमर साँसक अंतिम उसाँस धरि
आस्थाशील रहत
आ रहत स्पंदनयुक्त
हमर अंतिमो उसाँस
सुनबाक लेल उताहुल रहत हमर कान
वनमुरगीक जागरण संदेश
आ पपिहराक नव भोरक एलान।
- पुस्तक : ऐ अकाबोन मे (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 36)
- रचनाकार : राज
- प्रकाशन : नवारम्भ, पटना
- संस्करण : 2011
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