अभी कोई बारिश नहीं हो रही है
abhi koi barish nahin ho rahi hai
यहीं ठहरी हुई हूँ कुछ देर
ज्यों एक साँस व्यर्थ-सी थमी हुई
यहीं तुम्हें आना होगा अपने पंख समेट कर
फिर से उड़ जाने की मंशा को स्थगित करके
इस बार यहीं मिलन होगा हमारा
मैं नहीं जाना चाहती
उस अनजान नदी के किनारे
जहाँ तुम बुलाते हो बिना अता-पता दिए
चाँदनी रात है
तुम्हारे आँगन का कुदाल चमक रहा है अब भी
मधुमक्खियों का छत्ता शांत लटका हुआ है
छज्जे के कोने में
तुम्हारी चिरपरिचित प्रेमिका—
मृत्यु
नीले वस्त्र पहन साथ ही बैठी है
मैं उसे भगाने वाली हूँ—
अपने पाँव उधार देकर
इस समय रात है
सूखी रात
चंपा खिली हुई है
नीबू के फूल अपनी सुगंध से इस जगह को भर चुके हैं
हमारी दो बेटियाँ फिर से जन्म ले रही हैं
तुम आओ
अभी कोई बारिश नहीं हो रही है
- रचनाकार : सविता सिंह
- प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित
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