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आइ राष्ट्रकेँ पड़ल प्रयोजन

aai rashtrken paDal prayojan

चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

आइ राष्ट्रकेँ पड़ल प्रयोजन

चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

और अधिकचन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

    आइ राष्ट्रकेँ पड़ल प्रयोजन।

    तपः पूत किछु नेता चाही,

    सत्साहित्य प्रणेता चाही,

    शत्रु सैन्य दल मथन करक हित, भीष्म समान विजेता चाही।

    दिव्यदृष्टि व्याख्याता चाही,

    मन्त्रतत्त्व उद्गाता चाही,

    दलित-पतित हित त्राता चाही, सत्यक अनुसन्धाता चाही।

    व्याप्त सकल दुख हर्त्ता चाही,

    देशक कर्ता-धर्ता चाही,

    शिवि-दधीचि-कर्णक दानक पथकेर पुनः अनुसर्त्ता चाही।

    मानवीय गुण श्रोता चाही,

    सद्विचार प्रस्तोता चाही,

    ज्ञान-अग्निमे मनोविकारक हवन करक हित होता चाही।

    जागरूकता दैनिक चाही,

    सब बलिदानी सैनिक चाही,

    ठाम-ठामपर खीमा चाही, सतत सुरक्षित सीमा चाही।

    सागरमे पनिडुब्बी चाही,

    शत्रुक दल लय कुब्बी चाही,

    पछिमा चाही, पूबा चाही, सतत बनल मनूसबा चाही।

    तोपक मुहमे गोला चाही,

    कवच-कुण्डली चोला चाही,

    किछु विमान बम वर्षक चाही, राष्ट्रनीति आकर्षक चाही।

    सदा श्रमी सभ कर्षक चाही,

    गौरव भारतवर्षक चाही,

    दृढ़ साहस संघर्षक चाही, फुजल बाट निष्कर्षक चाही।

    राष्ट्र विरोधी नाथल चाही,

    सब वंशीमे गाँथल चाही,

    बनल रहय आन्तरिक एकता,

    ताहू लय चाही संयोजन, आइ राष्ट्रकेँ यैह प्रयोजन।

    स्रोत :
    • पुस्तक : चन्द्रनाथमिश्र ‘अमर’ रचना संचयन (पृष्ठ 326)
    • संपादक : योगानन्द झा, शम्भुनाथ झा, विजयदेव झा
    • रचनाकार : चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’
    • प्रकाशन : साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2025

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